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अगस्त्यचिह्नादयनात्समीपं
दिगुत्तरा भास्वति संनिवृत्ते ।
आनन्दशीतामिव बाष्पवृष्टिं
हिमस्रुतिं हैमवतीं ससर्ज ॥

अन्वयः AI भास्वति अगस्त्यचिह्नात् अयनात् समीपम् संनिवृत्ते (सति), उत्तरा दिक् आनन्दशीताम् बाष्पवृष्टिम् इव हैमवतीम् हिमस्रुतिम् ससर्ज ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) अगस्त्येति॥ अगस्त्यश्चिह्नं यस्य तस्मादयनान्मार्गाद्दक्षिणायनाद्भास्वति समीपं संनिवृत्ते सति। उत्तरा दिक्। आनन्दशीतां बाष्पवृष्टिमिव। हैमवतीं हिमवत्संबन्धिनीं हिमस्रुतिं हिमनिष्यन्दं हिमनिष्यन्दं ससर्ज। अत्र प्रोषितप्रियासमागमसमाधिर्गम्यते ॥
Summary AI When the sun returned near the southern direction marked by the star Agastya (Canopus), the northern direction (Himalayas) released a flow of melting snow, which was like a shower of tears cooled by joy.
सारांश AI जब सूर्य दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर मुड़ा, तब हिमालय की ओर वाली उत्तर दिशा ने आनंद के आंसुओं के समान ओस की बूंदों को बरसाना शुरू कर दिया।
पदच्छेदः AI
अगस्त्यचिह्नात्अगस्त्यचिह्न (५.१) from the direction marked by Agastya
अयनात्अयन (५.१) from the path
समीपम्समीपम् near
दिक्दिश् (१.१) direction
उत्तराउत्तर (१.१) the northern
भास्वतिभास्वत् (७.१) the sun
संनिवृत्तेसंनिवृत्त (सम्+नि√वृत्+क्त, ७.१) having returned
आनन्दशीताम्आनन्दशीत (२.१) cool with joy
इवइव like
बाष्पवृष्टिम्बाष्पवृष्टि (२.१) a shower of tears
हिमस्रुतिम्हिमस्रुति (२.१) a flow of snow-melt
हैमवतीम्हैमवती (२.१) belonging to the Himalayas
ससर्जससर्ज (√सृज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) released
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
स्त्य चि ह्ना ना त्स मी पं
दि गु त्त रा भा स्व ति सं नि वृ त्ते
न्द शी ता मि बा ष्प वृ ष्टिं
हि स्रु तिं है तीं र्ज
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