तस्याः स राजोपपदं निशान्तं
कामीव कान्ताहृदयं प्रविश्य ।
यथार्हमन्यैरनुजीविलोकं
संभावयामास यथाप्रधानम् ॥
तस्याः स राजोपपदं निशान्तं
कामीव कान्ताहृदयं प्रविश्य ।
यथार्हमन्यैरनुजीविलोकं
संभावयामास यथाप्रधानम् ॥
कामीव कान्ताहृदयं प्रविश्य ।
यथार्हमन्यैरनुजीविलोकं
संभावयामास यथाप्रधानम् ॥
अन्वयः
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सः कामी कान्ताहृदयम् इव तस्याः राजोपपदम् निशान्तम् प्रविश्य, अन्यैः अनुजीविलोकम् यथाप्रधानम् यथार्हम् संभावयामास ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्या इति॥ स कुशस्तस्याः पुरः संबन्धि राजोपपदं
राजशब्द पूर्वं निशान्तम्। राजभवनमित्यर्थः। निशान्तं भवनोषसोः इति विश्वः। कामी कान्तहृदयमिव प्रविश्य। अन्यैर्निशान्तैरनुजीविलोकममात्यादिकं यथाप्रधानं मानानुसारेण। यथार्हं यथोचितम्। तत्तदुचितगृहैरित्यर्थः। संभावयामास ॥
Summary
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He, entering the royal palace of that city just as a lover enters the heart of his beloved, honored his dependents and others according to their rank and merit.
सारांश
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राजा कुश ने अपने राजभवन में वैसे ही प्रवेश किया जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेयसी के हृदय में। वहाँ उन्होंने सेवकों को पद के अनुसार स्थान दिया।
पदच्छेदः
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| तस्याः | तत् (६.१) | of that (city) |
| सः | तत् (१.१) | he |
| राजोपपदम् | राजन्–उपपद (२.१) | named 'royal' |
| निशान्तम् | निशान्त (२.१) | palace |
| कामी | कामिन् (१.१) | a lover |
| इव | इव | like |
| कान्ताहृदयम् | कान्ता–हृदय (२.१) | the heart of a beloved |
| प्रविश्य | प्रविश्य (प्र√विश्+ल्यप्) | having entered |
| यथार्हम् | यथार्हम् | according to merit |
| अन्यैः | अन्य (३.३) | others |
| अनुजीविलोकम् | अनुजीविन्–लोक (२.१) | the host of dependents |
| संभावयामास | संभावयामास (सम्√भू +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | honored |
| यथाप्रधानम् | यथाप्रधानम् | according to rank |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्याः | स | रा | जो | प | प | दं | नि | शा | न्तं |
| का | मी | व | का | न्ता | हृ | द | यं | प्र | वि | श्य |
| य | था | र्ह | म | न्यै | र | नु | जी | वि | लो | कं |
| सं | भा | व | या | मा | स | य | था | प्र | धा | नम् |
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