तस्य द्विपानां मदवारिसेका-
त्खुराभिघाताञ्च तुरंगमाणाम् ।
रेणुः प्रपेदे पथि पङ्क्तभावं
पङ्कोऽपि रेणुत्वमियाय नेतुः ॥
तस्य द्विपानां मदवारिसेका-
त्खुराभिघाताञ्च तुरंगमाणाम् ।
रेणुः प्रपेदे पथि पङ्क्तभावं
पङ्कोऽपि रेणुत्वमियाय नेतुः ॥
त्खुराभिघाताञ्च तुरंगमाणाम् ।
रेणुः प्रपेदे पथि पङ्क्तभावं
पङ्कोऽपि रेणुत्वमियाय नेतुः ॥
अन्वयः
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नेतुः तस्य पथि द्विपानाम् मद-वारि-सेकात् च तुरंगमाणाम् खुर-अभिघातात् रेणुः पङ्क-भावम् प्रपेदे, पङ्कः अपि रेणुत्वम् इयाय ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्येति॥ नेतुस्तस्य कुशस्य द्विपानां मदवारिभिः सेकात्तुरंगमाणां खुराभिघाताञ्च यथासंख्यं पथि रेणू रजः पङ्कभावं पङ्कतां प्रपेदे। पङ्कोऽपि रेणुत्वमियाय। तस्य तावदस्तीत्यर्थः ॥
Summary
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On the path of that leader, dust, from the sprinkling of the elephants' rut-fluid and the striking of the horses' hooves, turned into mud; and the mud, in turn, became dust again.
सारांश
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हाथियों के मदजल से मार्ग की धूल कीचड़ बन गई, और घोड़ों के खुरों के प्रहार से वही कीचड़ पुनः धूल बनकर उड़ने लगा।
पदच्छेदः
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| तस्य | तद् (६.१) | his |
| द्विपानां | द्विप (६.३) | of the elephants |
| मदवारिसेकात् | मद–वारि–सेक (५.१) | from the sprinkling of rut-fluid |
| खुराभिघातात् | खुर–अभिघात (५.१) | from the striking of hooves |
| च | च | and |
| तुरंगमाणाम् | तुरंगम (६.३) | of the horses |
| रेणुः | रेणु (१.१) | dust |
| प्रपेदे | प्रपेदे (प्र√पद् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | attained |
| पथि | पथिन् (७.१) | on the path |
| पङ्कभावं | पङ्क–भाव (२.१) | the state of mud |
| पङ्कः | पङ्क (१.१) | mud |
| अपि | अपि | also |
| रेणुत्वम् | रेणुत्व (२.१) | the state of dust |
| इयाय | इयाय (√इ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attained |
| नेतुः | नेतृ (६.१) | of the leader |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्य | द्वि | पा | नां | म | द | वा | रि | से | का |
| त्खु | रा | भि | घा | ता | ञ्च | तु | रं | ग | मा | णाम् |
| रे | णुः | प्र | पे | दे | प | थि | प | ङ्क्त | भा | वं |
| प | ङ्को | ऽपि | रे | णु | त्व | मि | या | य | ने | तुः |
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