उद्यच्छमाना गमनाय पश्चा-
त्पुरो निवेशे पथि च व्रजन्ती ।
सा यत्र सेना ददृशे नृपस्य
तत्रैव सामग्र्यमतिं चकार ॥
उद्यच्छमाना गमनाय पश्चा-
त्पुरो निवेशे पथि च व्रजन्ती ।
सा यत्र सेना ददृशे नृपस्य
तत्रैव सामग्र्यमतिं चकार ॥
त्पुरो निवेशे पथि च व्रजन्ती ।
सा यत्र सेना ददृशे नृपस्य
तत्रैव सामग्र्यमतिं चकार ॥
अन्वयः
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नृपस्य सा सेना पश्चात् गमनाय उद्यच्छमाना, पुरः निवेशे, पथि च व्रजन्ती, यत्र ददृशे, तत्र एव सामग्र्य-मतिम् चकार ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
उद्यच्छमानेति॥ पश्चात्कुशावत्याः सकाशाद्गमनाय प्रयाणाय तथा पुरोऽग्रे निवेशे निमित्ते। निवेष्टुं चेत्यर्थः। उद्यच्छमानोद्योगं कुर्वती।
समुदाङ्भ्यो यमोऽग्रन्थे (अष्टाध्यायी १.३.७५ ) इत्यस्य सकर्मकाधिकारत्वादात्मनेपदम्। पथि च व्रजन्ती नृपस्य सा सेना यत्र पश्चात्पुरो मध्ये वा ददृशे तत्रैव सामग्र्यमतिं कृत्स्नताबुद्धिं चकार। अपरिमिता तस्य सेनेत्यर्थः ॥
Summary
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The king's army, whether preparing to march from the rear, setting up camp in the front, or moving along the path, wherever it was seen, it gave the impression of being a complete, self-sufficient entity.
सारांश
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राजा की सेना इतनी विशाल थी कि प्रस्थान करते समय, मार्ग में चलते हुए या पड़ाव डालते समय, वह हर जगह अपनी पूर्णता का ही आभास कराती थी।
पदच्छेदः
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| उद्यच्छमाना | उद्यच्छमान (उद्√यम्+शानच्, १.१) | preparing |
| गमनाय | गमन (४.१) | for marching |
| पश्चात् | पश्चात् | from the rear |
| पुरः | पुरस् | in the front |
| निवेशे | निवेश (७.१) | in camping |
| पथि | पथिन् (७.१) | on the path |
| च | च | and |
| व्रजन्ती | व्रजन्त् (√व्रज्+शतृ, १.१) | moving |
| सा | तद् (१.१) | that |
| यत्र | यत्र | wherever |
| सेना | सेना (१.१) | army |
| ददृशे | ददृशे (√दृश् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was seen |
| नृपस्य | नृप (६.१) | of the king |
| तत्रैव | तत्र–एव | there itself |
| सामग्र्यमतिं | सामग्र्य–मति (२.१) | the impression of completeness |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | द्य | च्छ | मा | ना | ग | म | ना | य | प | श्चा |
| त्पु | रो | नि | वे | शे | प | थि | च | व्र | ज | न्ती |
| सा | य | त्र | से | ना | द | दृ | शे | नृ | प | स्य |
| त | त्रै | व | सा | म | ग्र्य | म | तिं | च | का | र |
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