अथेतरे सप्तरघुप्रवीरा
ज्येष्ठं पुरोजन्मतया गुणैश्च ।
चक्रुः कुशं रत्नविशेषभाजं
सौभ्रात्रमेषां हि कुलानुसारि ॥
अथेतरे सप्तरघुप्रवीरा
ज्येष्ठं पुरोजन्मतया गुणैश्च ।
चक्रुः कुशं रत्नविशेषभाजं
सौभ्रात्रमेषां हि कुलानुसारि ॥
ज्येष्ठं पुरोजन्मतया गुणैश्च ।
चक्रुः कुशं रत्नविशेषभाजं
सौभ्रात्रमेषां हि कुलानुसारि ॥
अन्वयः
AI
अथ इतरे सप्त रघुप्रवीराः पुरोजन्मतया गुणैः च ज्येष्ठं कुशं रत्नविशेषभाजं चक्रुः। हि एषां सौभ्रात्रं कुलानुसारि (अस्ति)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथ रामनिर्वाणानन्तरम्। इतरे लवादयः सप्तरघुप्रवीराः। पुरः पूर्वं जन्म यस्य तस्य भावस्तत्ता तया। गुणैश्च ज्येष्ठं कुशं रत्नविशेषभाजं तत्तच्छ्रेष्ठवस्तुभागिनं चक्रुः। तदुक्तम्-
जातौ जातौ यदुत्कृष्टं तद्रत्नमभिधीयते इति। तथा हि-सुभ्रातॄणां भावः सौभ्रात्रम्। हायनान्त- (अष्टाध्यायी ५.१.१३० ) इत्यादिना युवादित्वादण्प्रत्ययः। एषां कुशलवादीनां कुलानुसारि वंशानुगतं हि ॥
Summary
AI
Then, the other seven heroes of Raghu's line, the younger brothers, made Kusha, the eldest by birth and virtues, the king (recipient of the jewel-throne). Indeed, their brotherly affection was in keeping with their family's tradition.
सारांश
AI
अन्य सात रघुवंशी राजकुमारों ने जन्म और गुणों में ज्येष्ठ कुश को श्रेष्ठ रत्नों का स्वामी बनाया, क्योंकि उनके कुल में भाइयों के प्रति ऐसा ही प्रेम रहा है।
पदच्छेदः
AI
| अथ | अथ | Then |
| इतरे | इतर (१.३) | the other |
| सप्तरघुप्रवीराः | सप्तन्–रघु–प्रवीर (१.३) | seven heroes of the Raghu dynasty |
| ज्येष्ठम् | ज्येष्ठ (२.१) | the eldest |
| पुरोजन्मतया | पुरस्–जन्मन्–ता (३.१) | due to being born first |
| गुणैः | गुण (३.३) | by virtues |
| च | च | and |
| चक्रुः | चक्रुः (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | made |
| कुशम् | कुश (२.१) | Kusha |
| रत्नविशेषभाजम् | रत्न–विशेष–भाज् (२.१) | the recipient of the best of jewels (the throne) |
| सौभ्रात्रम् | सौभ्रात्र (१.१) | brotherly affection |
| एषाम् | एतद् (६.३) | their |
| हि | हि | for |
| कुलानुसारि | कुल–अनुसारिन् (१.१) | in accordance with the family tradition |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थे | त | रे | स | प्त | र | घु | प्र | वी | रा |
| ज्ये | ष्ठं | पु | रो | ज | न्म | त | या | गु | णै | श्च |
| च | क्रुः | कु | शं | र | त्न | वि | शे | ष | भा | जं |
| सौ | भ्रा | त्र | मे | षां | हि | कु | ला | नु | सा | रि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.