अन्वयः
AI
आत्मचतुर्भागे तस्मिन् (लक्ष्मणे) प्राक् नाकम् अधितस्थुषि (सति), राघवः भुवि त्रिपात् धर्मः इव शिथिलम् तस्थौ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्मिन्निति॥ चतुर्थो भागश्चतुर्भागः। संख्याशब्दस्य वृत्तिविषये पूरणार्थत्वं शतांशवत्। आत्मचतुर्भागे तस्मिंल्लक्ष्मणे प्राङ्नाकमधितस्थुषि पूर्वं स्वर्गं जग्मुषि सति राघवो रामः भुवि त्रिपाद्धर्म इव। शिथिलं तस्थौ । पादविकलो हि शिथिलं तिष्ठतीति भावः। त्रेतायां धर्मस्त्रिपादित्याहुः। पादश्चतुर्थांशुः अङ्घ्रिश्च ध्वन्यते।
पादा रश्म्यङ्घ्रितुर्यांशाः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.९७ ) । त्रयः पादा यस्यासौ त्रिपात्। संख्यासुपूर्वस्य (अष्टाध्यायी ५.४.१४० ) इत्यकारलोपः समासान्तः ॥
Summary
AI
When Lakshmana, who was a fourth part of Rama himself, had ascended to heaven, Raghava remained weakly on earth, like the personified Dharma standing on only three feet after one foot was lost.
सारांश
AI
अपने चतुर्थ अंश लक्ष्मण के स्वर्ग जाने पर राम पृथ्वी पर वैसे ही रह गए जैसे तीन पैरों वाला धर्म अत्यंत शिथिल खड़ा हो।
पदच्छेदः
AI
| तस्मिन् | तद् (७.१) | When he |
| आत्मचतुर्भागे | आत्मन्–चतुर्–भाग (७.१) | who was the fourth part of himself |
| प्राक् | प्राच् | already |
| नाकम् | नाक (२.१) | to heaven |
| अधितस्थुषि | अधितस्थिवस् (अधि√स्था+क्वसु, ७.१) | had ascended |
| राघवः | राघव (१.१) | Raghava (Rama) |
| शिथिलम् | शिथिल | weakly |
| तस्थौ | तस्थौ (√स्था कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | remained |
| भुवि | भू (७.१) | on the earth |
| धर्मः | धर्म (१.१) | Dharma |
| त्रिपात् | त्रि–पाद् (१.१) | three-footed |
| इव | इव | like |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | न्ना | त्म | च | तु | र्भा | गे |
| प्रा | ङ्ग | क | म | धि | त | स्थु | षि |
| रा | घ | वः | शि | थि | लं | त | स्थौ |
| भु | वि | ध | र्म | स्त्रि | पा | दि | व |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.