अन्वयः
AI
इति आरोपितपुत्राः ते जनेश्वराः भर्तृलोकप्रपन्नानाम् जननीनाम् क्रमात् निवापान् विदधुः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इतीति॥ इत्यारोपितपुत्रास्ते जनेश्वरा रामादयो भर्तृलोकप्रपन्नानां स्वर्यातानां जननीनां क्रमान्निवापाञ्श्राद्धादीन्विदधुश्चक्रुः ॥
Summary
AI
Thus, those lords of men (Rama and his brothers), having established their sons on their thrones, duly performed the funeral rites for their mothers, who had passed on to their husband's world.
सारांश
AI
पुत्रों को राज्यासीन करने के बाद उन राजाओं ने अपनी स्वर्गवासी माताओं का शास्त्रोक्त विधि से श्राद्ध कर्म संपन्न किया।
पदच्छेदः
AI
| इति | इति | thus |
| आरोपितपुत्राः | आरोपित–पुत्र (१.३) | having established their sons |
| ते | तद् (१.३) | those |
| जननीनाम् | जननी (६.३) | of their mothers |
| जनेश्वराः | जन–ईश्वर (१.३) | lords of men |
| भर्तृलोकप्रपन्नानाम् | भर्तृलोक–प्रपन्न (६.३) | of those who had gone to their husband's world |
| निवापान् | निवाप (२.३) | funeral offerings |
| विदधुः | विदधुः (वि√धा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | performed |
| क्रमात् | क्रमात् | duly |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | त्या | रो | पि | त | पु | त्रा | स्ते |
| ज | न | नी | नां | ज | ने | श्व | राः |
| भ | र्तृ | लो | क | प्र | प | न्ना | नां |
| नि | वा | पा | न्वि | द | धुः | क्र | मात् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.