ऋषीन्विसृज्य यज्ञान्ते सुहृदश्च पुरस्कृतान् ।
रामः सीतागतं स्नेहं निदधे तदपत्ययोः ॥

अन्वयः AI यज्ञ-अन्ते ऋषीन् पुरस्कृतान् सुहृदः च विसृज्य, रामः सीतागतम् स्नेहम् तदपत्ययोः निदधे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) ऋषीनिति॥ रामो यज्ञान्ते पुरस्कृतान्पूजितान्। ऋषीन्सुहृदश्च विसृज्य सीतागतं स्नेहं तदपत्ययोः कुशलवयोर्निदधे ॥
Summary AI At the end of the sacrifice, after bidding farewell to the sages and honored friends, Rama transferred the affection he had for Sita onto her two children.
सारांश AI यज्ञ समाप्त होने पर ऋषियों और मित्रों को विदा कर राम ने सीता के प्रति अपना समस्त अनुराग उनके पुत्रों में समर्पित कर दिया।
पदच्छेदः AI
ऋषीन्ऋषि (२.३) the sages
विसृज्यविसृज्य (वि√सृज्+ल्यप्) having bid farewell
यज्ञ-अन्तेयज्ञअन्त (७.१) at the end of the sacrifice
सुहृदःसुहृद् (२.३) friends
and
पुरस्कृतान्पुरस्कृत (पुरस्√कृ+क्त, २.३) honored
रामःराम (१.१) Rama
सीतागतम्सीतागत (२.१) directed towards Sita
स्नेहम्स्नेह (२.१) affection
निदधेनिदधे (नि√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) placed
तदपत्ययोःतद्अपत्य (७.२) on her two children
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
षी न्वि सृ ज्य ज्ञा न्ते
सु हृ श्च पु स्कृ तान्
रा मः सी ता तं स्ने हं
नि धे त्य योः
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