अन्वयः
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विधिबलापेक्षी गुरुः धरायाम् सीताप्रत्यर्पणैषिणः धन्विनः तस्य संरम्भम् शमयामास ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
धरायामिति॥ सीताप्रत्यर्पणमिच्छतीति तथोक्तस्य धन्विन आत्तधनुषस्तस्य रामस्य धरायां विषये संरम्भं विधिबलापेक्षी दैवशक्तिदर्शीं गुरुर्ब्रह्मा शमयामास। अवश्यंभावी विधिरिति भावः ॥
Summary
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The preceptor (Valmiki), who respected the power of fate, pacified the fury of the archer (Rama), who was demanding the return of Sita from the Earth.
सारांश
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सीता को वापस पाने की इच्छा से क्रोधित धनुर्धारी राम के उस आवेग को प्रारब्ध के ज्ञाता गुरु वशिष्ठ ने शांत किया।
पदच्छेदः
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| धरायाम् | धरा (७.१) | from the Earth |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| संरम्भम् | संरम्भ (२.१) | fury |
| सीताप्रत्यर्पणैषिणः | सीता–प्रत्यर्पण–एषिन् (६.१) | of him who desired the return of Sita |
| गुरुः | गुरु (१.१) | the preceptor (Valmiki) |
| विधिबलापेक्षी | विधिबल–अपेक्षिन् (१.१) | he who respected the power of fate |
| शमयामास | शमयामास (√शम् +णिच्+आम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | pacified |
| धन्विनः | धन्विन् (६.१) | of the archer (Rama) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ध | रा | यां | त | स्य | सं | र | म्भं |
| सी | ता | प्र | त्य | र्प | णै | षि | णः |
| गु | रु | र्वि | धि | ब | ला | पे | क्षी |
| श | म | या | मा | स | ध | न्वि | नः |
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