Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

तत्र नागफणोत्क्षिप्तसिंहासननिषेदुषी ।
समुद्ररशना साक्षात्प्रादुरासीद्वसुंधरा ॥

अन्वयः AI तत्र नागफणोत्क्षिप्तसिंहासननिषेदुषी समुद्ररशना वसुंधरा साक्षात् प्रादुरासीत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तत्रेति॥ तत्र प्रभामण्डले नागफणोत्क्षिप्ते सिंहासने निषेदुष्यासीना समुद्ररशना समुद्रमेखला साक्षात्। वसूनि धारयतीति वसुंधरा भूमिः। खचि ह्रस्वः (अष्टाध्यायी ६.४.९४ ) इति ह्रस्वः। प्रादुरासीत् ॥
Summary AI There, the Earth goddess, girdled by the oceans, appeared in person, seated on a throne held up by the hoods of serpents.
सारांश AI उसमें नागों के फणों से उठाए गए सिंहासन पर बैठी हुई समुद्र रूपी मेखला वाली साक्षात् पृथ्वी देवी प्रकट हुईं।
पदच्छेदः AI
तत्रतत्र there
नागफणोत्क्षिप्तसिंहासननिषेदुषीनागफणउत्क्षिप्तसिंहासन–निषेदुषी (नि√सद्+क्वसु, १.१) she who was seated on a throne held up by the hoods of serpents
समुद्ररशनासमुद्ररशना (१.१) girdled by the ocean
साक्षात्साक्षात् in person
प्रादुरासीत्प्रादुरासीत् (प्रादुस्√अस् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) appeared
वसुंधरावसुंधरा (१.१) the Earth
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
त्र ना णो त्क्षि प्त
सिं हा नि षे दु षी
मु द्र ना सा क्षा
त्प्रा दु रा सी द्व सुं रा
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.