अन्वयः
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अथ सीता वाल्मीकिशिष्येण आवर्जितम् पुण्यम् पयः आचम्य, सत्याम् सरस्वतीम् उदीरयामास ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथ वाल्मीकिशिष्येणावर्जितं दत्तं पुण्यं पय आचम्यसीता सत्यां सरस्वतीं वाचमुदीरयामासोञ्चारयामास ॥
Summary
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Then Sita, after sipping the holy water poured by Valmiki's disciple, uttered a true statement (an oath).
सारांश
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तब वाल्मीकि के शिष्य द्वारा दिए गए पवित्र जल से आचमन करके सीता ने सत्यवाणी का उच्चारण आरम्भ किया।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | then |
| वाल्मीकिशिष्येण | वाल्मीकि–शिष्य (३.१) | by Valmiki's disciple |
| पुण्यम् | पुण्य (२.१) | holy |
| आवर्जितम् | आवर्जित (आ√वृज्+क्त, २.१) | poured |
| पयः | पयस् (२.१) | water |
| आचम्य | आचम्य (आ√चम्+ल्यप्) | having sipped |
| उदीरयामास | उदीरयामास (उद्√ईर् +णिच्+आम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | uttered |
| सीता | सीता (१.१) | Sita |
| सत्याम् | सत्य (२.१) | true |
| सरस्वतीम् | सरस्वती (२.१) | speech |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | वा | ल्मी | कि | शि | ष्ये | ण |
| पु | ण्य | मा | व | र्जि | तं | प | यः |
| आ | च | म्यो | दी | र | या | मा | स |
| सी | ता | स | त्यां | स | र | स्व | तीम् |
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