अन्वयः
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मैथिली स्व-चारित्रम् उद्दिश्य ताः (प्रजाः) प्रत्याययतु । ततः पुत्रवतीम् एनाम् त्वत्-आज्ञया प्रतिपत्स्ये ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
ता इति॥ मैथिली स्वचारित्रमुद्दिश्य ताः प्रजाः प्रत्याययतु विश्वासयतु। विश्वासस्य बुद्धिरूपत्वात्
णौ गमिरबोधने (अष्टाध्यायी २.४.४६ ) इति इणो गम्यादेशो नास्ति। ततोऽनन्तरं पुत्रवतीमेनां सीतां त्वदाज्ञया प्रतिपत्स्ये स्वीकरिष्ये ॥
Summary
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"Let Maithili convince them (the subjects) by demonstrating her pure character. Then, by your command, I shall accept her, the mother of my sons."
सारांश
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अतः सीता प्रजा को अपने चरित्र का विश्वास दिलाएँ, जिसके बाद आपकी आज्ञा से मैं इन पुत्रवती सीता को आपको सौंप दूँगा।
पदच्छेदः
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| ताः | तद् (२.३) | them (the subjects) |
| स्वचारित्रं | स्व–चारित्र (२.१) | her own character |
| उद्दिश्य | उद्दिश्य (उद्√दिश्+ल्यप्) | by demonstrating |
| प्रत्याययतु | प्रत्याययतु (प्रति√इ +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let her convince |
| मैथिली | मैथिली (१.१) | Maithili (Sita) |
| ततः | ततः | then |
| पुत्रवतीं | पुत्रवत् (२.१) | her who has sons |
| एनां | एनद् (२.१) | her |
| प्रतिपत्स्ये | प्रतिपत्स्ये (प्रति√पद् कर्तरि लृट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I shall accept |
| त्वदाज्ञया | त्वद्–आज्ञा (३.१) | by your command |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ताः | स्व | चा | रि | त्र | मु | द्दि | श्य |
| प्र | त्या | य | य | तु | मै | थि | ली |
| त | तः | पु | त्र | व | ती | मे | नां |
| प्र | ति | प | त्स्ये | त्व | दा | ज्ञ | या |
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