अन्वयः
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(रामः उवाच) तात! ते स्नुषा नः समक्षम् जातवेदसि शुद्धा (अस्ति) । तु रक्षसः दौरात्म्यात् अत्रत्याः प्रजाः ताम् न श्रद्दधुः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तातेति॥ हे तात! ते स्नुषा सीता नोऽस्माकम्। अक्ष्णोः समीपं समक्षम्।
अव्ययीभावे शरत्प्रभृतिभ्यः (अष्टाध्यायी ५.४.१०७ ) इति समासान्तष्टच्। जातवेदसि वह्नौ शुद्धा। नास्माकमविश्वास इत्यर्थः। किंतु रक्षसो रावणस्य दौरात्म्यादत्रत्याः प्रजास्तां न श्रद्वधुर्न विशश्वसुः ॥
Summary
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(Rama replied) "O revered one, your daughter-in-law was purified in the fire in our presence. But due to the wickedness of the Rakshasa, the people here did not believe in her."
सारांश
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मुनि ने कहा कि आपकी पत्नी हमारे समक्ष अग्नि परीक्षा में शुद्ध सिद्ध हुई थीं, परन्तु दुष्ट राक्षस के कारण प्रजा ने उन पर विश्वास नहीं किया।
पदच्छेदः
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| तात | तात (८.१) | O revered one |
| शुद्धा | शुद्ध (√शुध्+क्त, १.१) | purified |
| समक्षं | समक्षम् | in the presence |
| नः | अस्मद् (६.३) | of us |
| स्नुषा | स्नुषा (१.१) | daughter-in-law |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| जातवेदसि | जातवेदस् (७.१) | in the fire |
| दौरात्म्यात् | दौरात्म्य (५.१) | due to the wickedness |
| रक्षसः | रक्षस् (६.१) | of the Rakshasa |
| तां | तद् (२.१) | her |
| तु | तु | but |
| न | न | not |
| अत्रत्याः | अत्रत्य (१.३) | of this place |
| श्रद्दधुः | श्रद्दधुः (श्रत्√धा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | believed |
| प्रजाः | प्रजा (१.३) | the subjects |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | त | शु | द्धा | स | म | क्षं | नः |
| स्नु | षा | ते | जा | त | वे | द | सि |
| दौ | रा | त्म्या | द्र | क्ष | स | स्तां | तु |
| ना | त्र | त्याः | श्र | द्व | धुः | प्र | जाः |
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