अन्वयः
AI
हि रघूणाम् यः कः चन एकः परंतपः परम् अस्ति, सः अपवादः उत्सर्गम् इव व्यावर्तयितुम् ईश्वरः अस्ति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
य इति॥ हि यस्मात्। पराञ्छत्रूंस्तापयतीति परंतपः।
द्विषत्परयोस्तापेः (अष्टाध्यायी ३.२.३९ ) इति खच्प्रत्ययः। खचि ह्रस्वः (अष्टाध्यायी ६.४.९४ ) इति ह्रस्वः। रघूणां मध्ये यः कश्चनैकः। अपवादो विशेषशास्त्रमुत्सर्गं सामान्यशास्त्रमिव। परं शत्रुं व्यावर्तयितुं बाधितुमीश्वरः समर्थः। अतः शत्रुघअनमेवादिदेशेति पूर्वेणान्वयः ॥
Summary
AI
For any single one of the Raghus who is a scorcher of foes is capable of superseding all others, just as a single grammatical exception (apavada) is capable of setting aside a general rule (utsarga).
सारांश
AI
रघुवंश का कोई एक भी प्रतापी वीर शत्रुओं को रोकने में समर्थ है, जैसे कोई अपवाद नियम सामान्य विधि को रोक देता है।
पदच्छेदः
AI
| यः | यद् (१.१) | Whoever |
| कः | किम् (१.१) | any |
| चन | चन | one |
| रघूणाम् | रघु (६.३) | of the Raghus |
| हि | हि | for |
| परम् | परम् | only |
| एकः | एक (१.१) | one |
| परंतपः | परंतप (१.१) | a scorcher of foes |
| अपवादः | अपवाद (१.१) | an exception |
| इव | इव | like |
| उत्सर्गम् | उत्सर्ग (२.१) | a general rule |
| व्यावर्तयितुम् | व्यावर्तयितुम् (वि+आ√वृत्+णिच्+तुमुन्) | to supersede |
| ईश्वरः | ईश्वर (१.१) | is capable |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यः | क | श्च | न | र | घू | णां | हि |
| प | र | मे | कः | प | रं | त | पः |
| अ | प | वा | द | इ | वो | त्स | र्गं |
| व्या | व | र्त | यि | तु | मी | श्व | रः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.