अन्वयः
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अथ राघवः तेषां क्षेमाय, अस्य नाम अरिनिग्रहात् यथार्थं करिष्यन् इव, शत्रुघ्ने आदिदेश।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
आदिदेशेति॥ अथ तेषां मुनीनां क्षेमाय क्षेमकरणाय राघवो रामः शत्रुघअनमादिदेश। अत्रोत्प्रेक्ष्यते-अस्य शत्रुघ्नस्य नाम अरिनिग्रहाच्छत्रुहननाद्धेतोः। यथाभूतोऽर्थो यस्य तद्यथार्थं करिष्यन्निव। शत्रुन्दन्तीति शत्रुघ्नः।
अमनुष्यकर्तृके च (अष्टाध्यायी ३.२.५३ ) इति चकारात्कृतघ्नशत्रुघ्नादयः सिद्धा इति दुर्गसिंहः। पाणिनीयेऽपि बहुलग्रहणाद्यथेष्टसिद्धिः कृततल्युटो बहुलम् (अष्टाध्यायी ३.३.११३ ) इति ॥
Summary
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Then, for the welfare of the sages, Raghava (Rama) gave the command to Shatrughna, as if to make his name—"Slayer of Enemies"—true to its meaning through the subjugation of this foe.
सारांश
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राम ने मुनियों के कल्याण के लिए शत्रुघ्न को आदेश दिया ताकि वे शत्रुओं का दमन कर अपना नाम सार्थक कर सकें।
पदच्छेदः
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| आदिदेश | आदिदेश (आ√दिश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he ordered |
| अथ | अथ | Then |
| शत्रुघ्ने | शत्रुघ्न (४.१) | to Shatrughna |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| क्षेमाय | क्षेम (४.१) | for the welfare |
| राघवः | राघव (१.१) | Raghava (Rama) |
| करिष्यन् | करिष्यन् (√कृ+स्य+शतृ, १.१) | intending to make |
| इव | इव | as if |
| नाम | नामन् (२.१) | name |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| यथार्थम् | यथार्थ (२.१) | true to its meaning |
| अरिनिग्रहात् | अरिनिग्रह (५.१) | by the subjugation of the enemy |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | दि | दे | शा | थ | श | त्रु | घ्ने |
| ते | षां | क्षे | मा | य | रा | घ | वः |
| क | रि | ष्य | न्नि | व | ना | मा | स्य |
| य | था | र्थ | म | रि | नि | ग्र | हात् |
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