अन्वयः
AI
रामस्य वृत्तम्, वाल्मीकेः कृतिः, तौ किंनर-स्वनौ (च) । तत् किम् (अस्ति) येन (एतत् त्रयम्) शृण्वताम् मनः हर्तुम् अलम् न स्याताम्?
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
वृत्तमिति॥ रामस्य वृत्तं वर्ण्यम्। वस्त्विति शेषः। वाल्मीकेः कृतिः काव्यम्। गेयमिति शेषः। तौ कुशलवौ किंनरस्वनौ किंनरकण्ठौ गायकौ। पुनरिति शेषः। अत एव तत्किं येन निमित्तेन तौ शृण्वतां मनो हर्तुमलं शक्तौ न स्याताम्। सर्वं सरसमित्यर्थः ॥
Summary
AI
The story was of Rama, the composition was Valmiki's, and the two singers had voices like Kinnaras. What was there that would not be able to captivate the minds of the listeners?
सारांश
AI
राम का चरित्र, वाल्मीकि की रचना और कुश-लव का किन्नरों जैसा मधुर स्वर; ऐसा क्या था जो सुनने वालों के मन को वश में न कर लेता?
पदच्छेदः
AI
| वृत्तं | वृत्त (१.१) | the story |
| रामस्य | राम (६.१) | of Rama |
| वाल्मीकेः | वाल्मीकि (६.१) | of Valmiki |
| कृतिः | कृति (१.१) | the composition |
| तौ | तद् (१.२) | those two |
| किंनरस्वनौ | किंनर–स्वन (१.२) | with voices like Kinnaras |
| किं | किम् (१.१) | what |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| येन | यद् (३.१) | by which |
| मनः | मनस् (२.१) | the mind |
| हर्तुम् | हर्तुम् (√हृ+तुमुन्) | to captivate |
| अलं | अलम् | able |
| स्यातां | स्याताम् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | would be |
| न | न | not |
| शृण्वताम् | शृण्वत् (√श्रु+शतृ, ६.३) | of the listeners |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वृ | त्तं | रा | म | स्य | वा | ल्मी | केः |
| कृ | ति | स्तौ | किं | न | र | स्व | नौ |
| किं | त | द्ये | न | म | नो | ह | र्तु |
| म | लं | स्या | तां | न | श्रृ | ण्व | ताम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.