अन्वयः
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निमन्त्रिताः महर्षयः च भौमानि धिष्ण्यानि एव न, ज्योतिर्मयानि अपि हित्वा, दिग्भ्यः एनम् अभिजग्मुः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
दिग्भ्य इति॥ निमन्त्रिता आहूता महर्षयश्च भूम्याः संबन्धीनि भौमानिधिष्ण्यानि स्थानान्येव न।
धिष्ण्यं स्थाने गृहे भेऽग्नौ इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१६३ ) । किंतु ज्योतिर्मयानि नक्षत्ररूपाणि धिष्ण्यान्यपि हित्वा दिग्भ्य एनं राममभिजग्मुः ॥
Summary
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And great sages, having been invited, came to him from all directions, leaving behind not only their earthly abodes but also their celestial, luminous ones.
सारांश
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निमंत्रण पाकर चारों दिशाओं से ऋषि-मुनि अपने सांसारिक और दिव्य आश्रमों को छोड़कर अयोध्या पहुँचने लगे।
पदच्छेदः
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| दिग्भ्यः | दिश् (५.३) | from all directions |
| निमन्त्रिताः | निमन्त्रित (नि√मन्त्र्+णिच्+क्त, १.३) | invited |
| च | च | and |
| एनम् | एनद् (२.१) | him (Rama) |
| अभिजग्मुः | अभिजग्मुः (अभि√गम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | came to |
| महर्षयः | महर्षि (१.३) | great sages |
| न | न | not |
| भौमानि | भौम (२.३) | earthly |
| एव | एव | only |
| धिष्ण्यानि | धिष्ण्य (२.३) | abodes |
| हित्वा | हित्वा (√हा+क्त्वा) | having left |
| ज्योतिर्मयानि | ज्योतिर्मय (२.३) | luminous |
| अपि | अपि | also |
छन्दः
उपगीतिः []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | ग्भ्यो | नि | म | न्त्रि | ता | श | अ | ||
| चै | न | म | भि | ज | ग्मु | र्म | ह | र्ष | यः |
| न | भौ | मा | न्ये | व | धि | ष्ण्या | |||
| नि | हि | त्वा | ज्यो | ति | र्म | या | न्य | पि |
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