अन्वयः
AI
इति आप्तवचनात् वर्णविक्रियाम् विनेष्यन् रामः वेगनिष्कम्पकेतुना पत्रेण दिशः पपात।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इतीति॥ इत्याप्तवचनाद्रामो वर्णविक्रियां वर्णापचारं विनेष्यन्नपनेष्यन् वेगेन निष्कम्पकेतुना पत्रेण वाहनेन पुष्पकेण।
पत्रं वाहनपक्षयोः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१८७ ) । दिशः पपात धावति स्म ॥
Summary
AI
Hearing this trustworthy voice and intending to correct the transgression of social order, Rama flew through the skies in his chariot, whose banner remained still due to its immense speed.
सारांश
AI
इस विश्वसनीय वाणी को सुनकर राम वर्ण-मर्यादा के उल्लंघन को रोकने हेतु तीव्र गति वाले विमान से दिशाओं के भ्रमण पर निकल पड़े।
पदच्छेदः
AI
| इति | इति | Thus |
| आप्तवचनात् | आप्त–वचन (५.१) | from the trustworthy utterance |
| रामः | राम (१.१) | Rama |
| विनेष्यन् | विनेष्यत् (वि√नी+स्य+शतृ, १.१) | intending to remove |
| वर्णविक्रियाम् | वर्ण–विक्रिया (२.१) | the disorder of the social classes |
| दिशः | दिश् (२.३) | the directions (skies) |
| पपात | पपात (√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | flew |
| पत्रेण | पत्र (३.१) | with his vehicle |
| वेगनिष्कम्पकेतुना | वेग–निष्कम्प–केतु (३.१) | whose banner was motionless due to speed |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | त्या | प्त | व | च | ना | द्रा | मो |
| वि | ने | ष्य | न्व | र्ण | वि | क्रि | याम् |
| दि | शः | प | पा | त | प | त्रे | ण |
| वे | ग | नि | ष्क | म्प | के | तु | ना |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.