Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

शोचनीयासि वसुधे या त्वं दशरथाञ्युता ।
रामहस्तमनुप्राप्य कष्टात्कष्टतरं गता ॥

अन्वयः AI वसुधे! या त्वम् दशरथात् च्युता सती रामहस्तम् अनुप्राप्य कष्टात् कष्टतरम् गता, सा त्वम् शोचनीया असि।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) शोचनीयेति॥ हे वसुधे! दशरथाञ्च्युता या त्वं रामहस्तमनुप्राप्य कष्टात्कष्टतरं गता सती शोचनीयाऽसि ॥
Summary AI The brahmin cried, "O Earth! You are pitiable. Having been separated from Dasharatha, you have fallen into Rama's hands only to go from a bad situation to a worse one."
सारांश AI वह विलाप करते हुए बोला, 'हे पृथ्वी! तुम अत्यंत दयनीय हो गई हो, क्योंकि दशरथ को छोड़कर राम के हाथों में पड़कर तुम्हारी दशा बदतर हो गई है।'
पदच्छेदः AI
शोचनीयाशोचनीय (√शुच्+अनीयर्, १.१) to be pitied
असिअसि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) you are
वसुधेवसुधा (८.१) O Earth!
यायद् (१.१) who
त्वम्युष्मद् (१.१) you
दशरथात्दशरथ (५.१) from Dasharatha
च्युताच्युत (√च्यु+क्त, १.१) separated
रामहस्तम्रामहस्त (२.१) the hand of Rama
अनुप्राप्यअनुप्राप्य (अनु+प्र√आप्+ल्यप्) having reached
कष्टात्कष्ट (५.१) from a difficult state
कष्टतरम्कष्टतर (२.१) to a more difficult one
गतागत (√गम्+क्त, १.१) gone
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
शो नी या सि सु धे
या त्वं था ञ्यु ता
रा स्त नु प्रा प्य
ष्टा त्क ष्ट रं ता
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.