अन्वयः
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पृष्टः सः, काले प्रत्यर्पयिष्यतः आद्यस्य कवेः शासनात्, राज्ञे सर्वतः वार्तम् आख्यत्, संततिम् तु न आख्यत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स इति॥ स शत्रुघ्नः पृष्टः सन्। सर्वतो वार्तं कुशलं राज्ञे रामाय। आख्यदाख्यातवान्। चक्षिङो लुङ्।
चक्षिडः ख्याञ् (अष्टाध्यायी २.४.५४ ) इति ख्याञादेशः। अस्यतिवक्ति- (अष्टाध्यायी ३.१.५२ ) इत्यङ्। आतो लोप इटि च (अष्टाध्यायी ६.४.६४ ) इत्याकारलोपः। ख्यातेर्वा लुङ्। संततिं कुशलवोत्पत्तिं नाख्यत्। कुतः? कालेऽवसरे प्रत्यर्पयिष्यत आद्यस्य कवेर्वाल्मीकेः शासनात् ॥
Summary
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When asked, Shatrughna reported all other news to the king but not about the children, obeying the command of the first poet, Valmiki, who intended to present them at the appropriate time.
सारांश
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राजा द्वारा कुशल-क्षेम पूछे जाने पर उस अश्व-रक्षक ने सब कुशल बताया, किंतु प्रजा में किसी संतान की अकाल मृत्यु का कोई समाचार नहीं दिया।
पदच्छेदः
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| सः | तत् (१.१) | He |
| पृष्टः | पृष्ट (√प्रछ्+क्त, १.१) | having been asked |
| सर्वतः | सर्वतः | from all sides |
| वार्तम् | वार्त (२.१) | news |
| आख्यत् | आख्यत् (आ√ख्या कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reported |
| राज्ञे | राजन् (४.१) | to the king |
| न | न | not |
| संततिम् | संतति (२.१) | about the offspring |
| प्रत्यर्पयिष्यतः | प्रत्यर्पयिष्यत् (प्रति√ऋ+णिच्+स्य+शतृ, ६.१) | of him who intended to return |
| काले | काल (७.१) | at the proper time |
| कवेः | कवि (६.१) | of the poet |
| आद्यस्य | आद्य (६.१) | of the first |
| शासनात् | शासन (५.१) | due to the command |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | पृ | ष्टः | स | र्व | तो | वा | र्त |
| मा | ख्य | द्रा | ज्ञे | न | सं | त | तिम् |
| प्र | त्य | र्प | यि | ष्य | तः | का | ले |
| क | रे | रा | द्य | स्य | शा | स | नात् |
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