अन्वयः
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कविः सः कुश-लव-उन्मृष्ट-गर्भ-क्लेदौ तौ तत्-आख्यया नामतः कुश-लवौ एव चकार किल ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स इति॥ स कविर्वाल्मीकिः कुशैर्दर्भैर्लवैर्गोपुच्छलोमभिः।
लवो लवणकिञ्जल्कपक्ष्मगोपुच्छलोमसु इति वैजयन्ती। उन्मृष्टो गर्भक्लेदो गर्भोपद्रवो ययोस्तौ कुशलवोन्मृष्टगर्भक्लेदौ तौ मैथिलेयौ तेषां कुशानां च लवानां चाख्यया नामतो नाम्ना यथासंख्यं कुशलवावेव चकार किल। कुशोन्मृष्टः कुशः। लवोन्मृष्टो लवः ॥
Summary
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It is said that the poet Valmiki named the two boys Kusha and Lava, after the Kusha grass and its tip (lava) with which he had wiped away the impurities of their birth.
सारांश
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कवि वाल्मीकि ने उन बालकों के जन्म के समय 'कुश' और 'लव' (घास और वस्त्र) से गर्भ की अशुद्धि दूर करने के कारण उनका नाम 'कुश' और 'लव' रखा।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | He |
| तौ | तद् (२.२) | those two |
| कुशलवोन्मृष्टगर्भक्लेदौ | कुश–लव–उन्मृष्ट–गर्भ–क्लेद (२.२) | whose impurity of birth was wiped by Kusha grass and its tip |
| तदाख्यया | तद्–आख्या (३.१) | by that name |
| कविः | कवि (१.१) | the poet (Valmiki) |
| कुशलवौ | कुश–लव (२.२) | Kusha and Lava |
| एव | एव | indeed |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | named |
| किल | किल | it is said |
| नामतः | नामतस् | by name |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | तौ | कु | श | ल | वो | न्मृ | ष्ट | ||
| ग | र्भ | क्ले | दौ | त | दा | ख्य | या | ||
| क | विः | कु | ल | वा | |||||
| वे | व | च | का | र | कि | ल | ना | म | तः |
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