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सौमित्रेर्निशितैर्बाणैरन्तरा शकलीकृतः ।
गात्रं पुष्परजः प्राप न शाखी नैरृतेरितः ॥

अन्वयः AI नैर्ऋतेरितः शाखी अन्तरा सौमित्रेः निशितैः बाणैः शकलीकृतः (सन्) पुष्प-रजः (भूत्वा) गात्रम् प्राप, न (पुनः शाखी भूत्वा) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) सौमित्रेरिति॥ नैर्ऋतेरितो रक्षःप्रेरितः शाख्यन्तरा मध्ये निशइतैर्बाणैः शकलीकृतः सन्, सौमित्रेः शत्रुघ्नस्य गात्रं न प्राप। किंतु पुष्परजः प्राप ॥
Summary AI The tree, hurled by the Rakshasa, was shattered midway by Shatrughna's sharp arrows and reached his body only as fine dust, not as a tree.
सारांश AI शत्रुघ्न ने अपने तीखे बाणों से उस फेंके गए वृक्ष के टुकड़े-टुकड़े कर दिए, जिससे उनके शरीर पर केवल फूलों का पराग ही गिरा।
पदच्छेदः AI
सौमित्रेःसौमित्रि (६.१) of Shatrughna's
निशितैःनिशित (३.३) by sharp
बाणैःबाण (३.३) arrows
अन्तराअन्तरा midway
शकलीकृतःशकलीकृत (√कृ+क्त, १.१) shattered into pieces
गात्रंगात्र (२.१) the body
पुष्परजःपुष्परजस् (२.१) pollen
प्रापप्राप (प्र√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) reached
not
शाखीशाखिन् (१.१) the tree
नैर्ऋतेरितःनैर्ऋतईरित (√ईरित+क्त, १.१) hurled by the Rakshasa
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
सौ मि त्रे र्नि शि तै र्बा णै
न्त रा ली कृ तः
गा त्रं पु ष्प जः प्रा
शा खी नै रृ ते रि तः
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