अन्वयः
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(सः) धूम-धूम्रः, वसा-गन्धी, ज्वाला-बभ्रु-शिरोरुहः, क्रव्याद्-गण-परीवारः, जङ्गमः चिता-अग्निः इव (आसीत्) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
धूमेति॥ किंभूतो लवणः? धूम इव धूम्रः कृष्णलोहितवर्णः।
धूम्रधूमलौ कृष्णलोहिते इत्यमरः (अमरकोशः १.५.१७ ) । वसागन्धो हृन्मेदोगन्धः। सोऽस्यास्तीति वसागन्धी। हृन्मेदस्तु वपा वसा इत्यमरः (अमरकोशः २.६.६५ ) । ज्वाला इव बभ्रवः पिशङ्गाः शिरोरुहाः केशा यस्य स तथोक्तः। विपुले नकुले विष्णौ बभ्रुः स्यात्पिङ्गले त्रिषु इत्यमरः (अमरकोशः १.५.१७ ) । क्रव्यं मांसमदन्तीति क्रव्यादो राक्षसाः, तेषां गण एव परीवारो यस्य स तथोक्तः। अत एव जंगमश्चरिष्णुशअचिताग्निरिव स्थितः। कृशानुपक्षे, -धूमैर्धूम्रवर्णः। ज्वाला एव शिरोरुहाः। क्रव्यादो गृध्रादयः इत्यनुसंधेयम् ॥
Summary
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He was grey with smoke, smelled of fat, and his hair was tawny like flames. With a retinue of flesh-eating demons, he appeared like a moving funeral pyre.
सारांश
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धुएँ के समान मटमैला, चर्बी की गंध वाला और भूरे बालों वाला वह भयानक राक्षस हिंसक जीवों से घिरा हुआ चलती-फिरती चिता के समान था।
पदच्छेदः
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| धूमधूम्रः | धूम–धूम्र (१.१) | grey with smoke |
| वसागन्धी | वसा–गन्धिन् (१.१) | smelling of fat |
| ज्वालाबभ्रुशिरोरुहः | ज्वाला–बभ्रु–शिरोरुह (१.१) | whose hair was tawny like flames |
| क्रव्याद्गणपरीवारः | क्रव्याद्–गण–परीवार (१.१) | whose retinue was a host of flesh-eaters |
| चिताग्निरिव | चिता–अग्नि (१.१)–इव | like a funeral pyre |
| जङ्गमः | जङ्गम (१.१) | moving |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| धू | म | धू | म्रो | व | सा | ग | न्धी |
| ज्वा | ला | ब | भ्रु | शि | रो | रु | हः |
| क्र | व्या | द्ग | ण | प | री | वा | र |
| श्चि | ता | ग्नि | रि | व | जं | ग | मः |
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