अन्वयः
AI
कुम्भीनस्याः कुक्षिजः सः च वनात् करम् इव सत्त्व-राशिम् आदाय उपस्थितः (सन्) मधूपघ्नम् प्राप ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स चेति॥ स शत्रुश्च मधूपघअनं नाम लवणपुरं प्राप। कुम्भीनसी नाम रावणस्वसा। तस्याः कुक्षिजः पुत्रो लवणश्च वनात्करं बलिमिव सत्त्वानां प्राणिनां राशिमादायोपस्थितः प्राप्तः ॥
Summary
AI
And that son of Kumbhinasi, Lavana, having returned from the forest bringing a heap of living beings like a tax, reached Madhupaghna.
सारांश
AI
शत्रुघ्न मधुपुर पहुँचे जहाँ लवण राक्षस वन्य जीवों का ढेर लेकर वन से लौट रहा था, जैसे कर वसूल कर आ रहा हो।
पदच्छेदः
AI
| सः | तद् (१.१) | He |
| च | च | and |
| प्राप | प्राप (प्र√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reached |
| मधूपघ्नम् | मधूपघ्न (२.१) | Madhupaghna (the forest) |
| कुम्भीनस्याः | कुम्भीनसी (६.१) | of Kumbhinasi |
| च | च | and |
| कुक्षिजः | कुक्षि–ज (१.१) | the son (Lavana) |
| वनात् | वन (५.१) | from the forest |
| करम् | कर (२.१) | tax |
| इव | इव | like |
| आदाय | आदाय (आ√दा+ल्यप्) | having taken |
| सत्त्वराशिम् | सत्त्व–राशि (२.१) | a heap of living beings |
| उपस्थितः | उपस्थित (उप√स्था+क्त, १.१) | who had arrived |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | च | प्रा | प | म | धू | प | घ्नं | ||
| कु | म्भी | न | स्या | श | अ | च | कु | क्षि | जः |
| व | ना | त्क | र | मि | वा | दा | य | ||
| स | त्त्व | रा | शि | मु | प | स्थि | तः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.