तस्यामेवस्य यामिन्यामन्तर्वत्नी प्रजावती ।
सुतावसूत संपन्नौ कोशदण्डाविव क्षितिः ॥

अन्वयः AI अस्य तस्याम् एव यामिन्याम्, अन्तर्वत्नी प्रजावती (सीता), क्षितिः इव संपन्नौ कोशदण्डौ इव, सुतौ असूत।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तस्यामिति॥ तस्यामेव यामिन्यां रात्रौ। अस्य शत्रुघ्नस्य। अन्तरस्या अस्तीत्यन्तर्वत्नी गर्भिणी अन्तर्वत्नी च गर्भिणी इत्यमरः (अमरकोशः २.६.२२ ) अन्तर्वत्पतिवतोर्मुक् (अष्टाध्यायी ४.१.३२ ) इति ङीप्, नुगागमश्च। प्रजावती भ्रातृजाया सीता। क्षितिः संपन्नौ समग्रौ कोशदण्डाविव। सुतावसूत ॥
Summary AI On that very night of his stay, the pregnant lady Sita gave birth to twin sons, just as the Earth brings forth its two great powers, the Treasury (Kosha) and the Army (Danda), both perfect and complete.
सारांश AI उसी रात्रि में सीता ने दो तेजस्वी पुत्रों को जन्म दिया, जैसे पृथ्वी कोष और सेना रूपी दो सिद्धियों को उत्पन्न करती है।
पदच्छेदः AI
तस्याम्तद् (७.१) On that
एवएव very
अस्यइदम् (६.१) his
यामिन्याम्यामिनी (७.१) in the night
अन्तर्वत्नीअन्तर्वत्नी (१.१) the pregnant one
प्रजावतीप्रजावती (१.१) the lady (Sita)
सुतौसुत (२.२) two sons
असूतअसूत (√सू कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) she gave birth to
संपन्नौसंपन्न (सम्√पद्+क्त, २.२) accomplished
कोशदण्डौकोशदण्ड (२.२) treasury and army
इवइव like
क्षितिःक्षिति (१.१) the earth
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
स्या मे स्य या मि न्या
न्त र्व त्नी प्र जा ती
सु ता सू सं न्नौ
को ण्डा वि क्षि तिः
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