अन्वयः
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यत् तत्र मज्जतां संमर्दः गोप्रतरकल्पः अभूत्, अतः तत् (तीर्थं) तदाख्यया (गोप्रतर इति) पावनं तीर्थं (इति) भुवि पप्रथे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
यदिति॥ यद्यस्मात्तत्र सरय्वां मज्जतां संमर्दः। गोप्रतरो गोप्रतरणम्। तत्कल्पोऽभूत्। अतस्तदाख्यया गोप्रतराख्यया पावनं शोधकं तीर्थं भुवि पप्रथे ॥
Summary
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Since the throng of people bathing there was like a ford for cattle, that sacred place of pilgrimage therefore became famous on earth by the name 'Gopratara'.
सारांश
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वहाँ स्नान करने वालों की भीड़ गायों के तैरकर पार करने के समान थी, इसलिए वह पवित्र तीर्थ पृथ्वी पर 'गोप्रतर' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
पदच्छेदः
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| यत् | यद् | Since |
| गोप्रतरकल्पः | गो–प्रतर–कल्प (१.१) | like a ford for cattle |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| संमर्दः | संमर्द (१.१) | the crowd |
| तत्र | तत्र | there |
| मज्जताम् | मज्जत् (√मस्ज्+शतृ, ६.३) | of those bathing |
| अतः | अतः | therefore |
| तदाख्यया | तद्–आख्या (३.१) | by that name |
| तीर्थम् | तीर्थ (१.१) | the holy place |
| पावनम् | पावन (१.१) | sacred |
| भुवि | भू (७.१) | on the earth |
| पप्रथे | पप्रथे (√प्रथ् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | became famous |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | द्गो | प्र | त | र | क | ल्पो | ऽभू |
| त्सं | म | र्द | स्त | त्र | म | ज्ज | ताम् |
| अ | त | स्त | दा | ख्य | या | ती | र्थं |
| पा | व | नं | भु | वि | प | प्र | थे |
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