सीतां हित्वा दशमुखरिपुर्नोपयेमे यदन्यां
तस्या एव प्रतिकृतिसखो यत्क्रतूनाजहार ।
वृत्तान्तेन श्रवणविषयप्रापिणा तेन भर्तुः
सा दुर्वारं कथमपि परित्यागदुःखं विषेहे ॥
सीतां हित्वा दशमुखरिपुर्नोपयेमे यदन्यां
तस्या एव प्रतिकृतिसखो यत्क्रतूनाजहार ।
वृत्तान्तेन श्रवणविषयप्रापिणा तेन भर्तुः
सा दुर्वारं कथमपि परित्यागदुःखं विषेहे ॥
तस्या एव प्रतिकृतिसखो यत्क्रतूनाजहार ।
वृत्तान्तेन श्रवणविषयप्रापिणा तेन भर्तुः
सा दुर्वारं कथमपि परित्यागदुःखं विषेहे ॥
अन्वयः
AI
यत् दशमुखरिपुः सीतां हित्वा अन्याम् न उपयेमे, यत् च तस्याः प्रतिकृतिसखः एव क्रतून् आजहार, तेन श्रवणविषयप्रापिणा भर्तुः वृत्तान्तेन सा दुर्वारं परित्यागदुःखं कथम् अपि विषेहे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सीतामिति॥ दशमुखरिपू रामः सीतां हित्वा त्यक्त्वाऽन्यां स्त्रियं नोपयेमे न परिणीतवानिति यत्।
उपाद्यमः स्वकरणे (अष्टाध्यायी १.३.५६ ) इत्यात्मनेपदम्। किंच, तस्याः सीताया एव प्रतिकृतेः प्रतिमायाः हिरण्मय्याः सखा प्रतिकृतिसखः सन् क्रतूनाजहाराहृतवानिति यत्तेन श्रवणविषयप्रापिणा श्रोत्रदेशगामिना भर्तुर्वृत्तान्तेन वार्तया हेतुना सा सीता दुर्वारं दुर्निरोधं परेत्यागेन यद्दुःखं तत्कथमपि विषेहे विसोढवती ॥
Summary
AI
Because Rama, the enemy of Ravana, did not marry another woman after abandoning Sita, and because he performed sacrifices with only her golden image as his companion—hearing this news of her husband, she somehow endured the unbearable pain of abandonment.
सारांश
AI
राम द्वारा दूसरा विवाह न करने और सीता की स्वर्ण-प्रतिमा को साथ रखकर यज्ञ करने का समाचार सुनकर, सीता ने परित्याग के अत्यंत कठिन दुःख को किसी तरह सहन किया।
पदच्छेदः
AI
| सीताम् | सीता (२.१) | Sita |
| हित्वा | हित्वा (√हा+क्त्वा) | having abandoned |
| दशमुखरिपुः | दशमुख–रिपु (१.१) | the enemy of the ten-faced one (Rama) |
| न | न | not |
| उपयेमे | उपयेमे (उप√यम् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he married |
| यत् | यत् | because |
| अन्याम् | अन्या (२.१) | another |
| तस्याः | तद् (६.१) | her |
| एव | एव | only |
| प्रतिकृतिसखः | प्रतिकृति–सख (१.१) | having her image as his companion |
| यत् | यत् | because |
| क्रतून् | क्रतु (२.३) | sacrifices |
| आजहार | आजहार (आ√हृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he performed |
| वृत्तान्तेन | वृत्तान्त (३.१) | by the news |
| श्रवणविषयप्रापिणा | श्रवण–विषय–प्रापिन् (३.१) | which reached the range of her hearing |
| तेन | तद् (३.१) | by that |
| भर्तुः | भर्तृ (६.१) | of her husband |
| सा | तद् (१.१) | she |
| दुर्वारम् | दुर्वार (२.१) | unbearable |
| कथम् | कथम् | somehow |
| अपि | अपि | |
| परित्यागदुःखम् | परित्याग–दुःख (२.१) | the pain of abandonment |
| विषेहे | विषेहे (वि√सह् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | she endured |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सी | तां | हि | त्वा | द | श | मु | ख | रि | पु | र्नो | प | ये | मे | य | द | न्यां |
| त | स्या | ए | व | प्र | ति | कृ | ति | स | खो | य | त्क्र | तू | ना | ज | हा | र |
| वृ | त्ता | न्ते | न | श्र | व | ण | वि | ष | य | प्रा | पि | णा | ते | न | भ | र्तुः |
| सा | दु | र्वा | रं | क | थ | म | पि | प | रि | त्या | ग | दुः | खं | वि | षे | हे |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.