तामेकभार्यां परिवादभीरोः
साध्वीमपि त्यक्तवतो नृपस्य ।
वक्षस्यसंघट्टसुखं वसन्ती
रेजे सपत्नीरहितेव लक्ष्मीः ॥
तामेकभार्यां परिवादभीरोः
साध्वीमपि त्यक्तवतो नृपस्य ।
वक्षस्यसंघट्टसुखं वसन्ती
रेजे सपत्नीरहितेव लक्ष्मीः ॥
साध्वीमपि त्यक्तवतो नृपस्य ।
वक्षस्यसंघट्टसुखं वसन्ती
रेजे सपत्नीरहितेव लक्ष्मीः ॥
अन्वयः
AI
परिवादभीरोः, ताम् एकभार्याम् साध्वीम् अपि त्यक्तवतः नृपस्य वक्षसि असङ्घट्टसुखं वसन्ती लक्ष्मीः सपत्नी-रहिता इव रेजे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तामिति॥ परिवादभीरोर्निन्दाभीरोरत एव एकभार्यामपि साध्वीमपि तां सीतां त्यक्तवतो नृपस्य वक्षस्यसंघट्टसुखमसंभाव्यसुखं वसन्ती लक्ष्मीः सपत्नीरहितेव रेजे दिदीपे। तस्य स्त्र्यन्तरपरिग्रहो नाभूदिति भावः ॥
Summary
AI
On the chest of the king, who, fearing scandal, had abandoned even his chaste, only wife, the goddess of fortune (Lakshmi) resided with the pleasure of having no rival, shining as if she were without a co-wife.
सारांश
AI
लोकनिंदा के भय से अपनी साध्वी पत्नी का त्याग करने वाले राजा के वक्ष पर राजलक्ष्मी बिना किसी सौत (दूसरी पत्नी) के संकोच के सुखपूर्वक अकेली पत्नी की भांति सुशोभित हुईं।
पदच्छेदः
AI
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| एकभार्याम् | एकभार्या (२.१) | his only wife |
| परिवादभीरोः | परिवादभीरु (६.१) | of him who was afraid of scandal |
| साध्वीम् | साध्वी (२.१) | the chaste one |
| अपि | अपि | even |
| त्यक्तवतः | त्यक्तवत् (√त्यज्+क्तवतु, ६.१) | of him who had abandoned |
| नृपस्य | नृप (६.१) | of the king |
| वक्षसि | वक्षस् (७.१) | on the chest |
| असङ्घट्टसुखम् | असङ्घट्ट–सुखम् | with the pleasure of no rivalry |
| वसन्ती | वसन्ती (√वस्+शतृ, १.१) | residing |
| रेजे | रेजे (√राज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | shone |
| सपत्नीरहिता | सपत्नी–रहित (१.१) | without a co-wife |
| इव | इव | as if |
| लक्ष्मीः | लक्ष्मी (१.१) | the goddess Lakshmi |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | मे | क | भा | र्यां | प | रि | वा | द | भी | रोः |
| सा | ध्वी | म | पि | त्य | क्त | व | तो | नृ | प | स्य |
| व | क्ष | स्य | सं | घ | ट्ट | सु | खं | व | स | न्ती |
| रे | जे | स | प | त्नी | र | हि | ते | व | ल | क्ष्मीः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.