पयोघटैराश्रमबालवृक्षा-
न्संवर्धयन्ती स्वबलानुरूपैः ।
असंशयं प्राक्तनयोपपत्तेः
स्तनंधयप्रीतिमवाप्स्यसि त्वम् ॥
पयोघटैराश्रमबालवृक्षा-
न्संवर्धयन्ती स्वबलानुरूपैः ।
असंशयं प्राक्तनयोपपत्तेः
स्तनंधयप्रीतिमवाप्स्यसि त्वम् ॥
न्संवर्धयन्ती स्वबलानुरूपैः ।
असंशयं प्राक्तनयोपपत्तेः
स्तनंधयप्रीतिमवाप्स्यसि त्वम् ॥
अन्वयः
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त्वम् स्वबलानुरूपैः पयोघटैः आश्रमबालवृक्षान् संवर्धयन्ती (सती), प्राक्तनया उपपत्तेः असंशयम् स्तनंधयप्रीतिम् अवाप्स्यसि।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
पय इति॥ स्वबलानुरूपैः स्वशक्त्यनुसारिभिः पयसामम्भसां घटैः। स्तन्यैरिति च ध्वन्यते। आश्रमबालवृक्षान्संवर्धयन्ती त्वं तनयोपपत्तेः प्राक् पूर्वम्। असंशयं यथा तथा। स्तनं धयति पिबतीति स्तनंधयः शिशुः।
नासिकास्तनयोर्ध्माधेटाः (अष्टाध्यायी ३.२.२९ ) इति खश्प्रत्ययः। अरुर्द्विष- (अष्टाध्यायी ६.३.६७ ) इत्यादिना मुमागमः। तस्मिन्या प्रीतिस्तामवाप्स्यसि। ततः परं सुलभ एव विनोद इति भावः ॥
Summary
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"While nurturing the young trees of the hermitage with water-pots suited to your strength, you will, without a doubt, experience the affection one feels for a suckling infant, as a precursor to your own motherhood."
सारांश
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आश्रम के नन्हे वृक्षों को अपने सामर्थ्य अनुसार जल से सींचते हुए तुम संतान के जन्म से पूर्व ही माँ जैसा सुख और प्रेम अनुभव करने लगोगी।
पदच्छेदः
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| पयोघटैः | पयस्–घट (३.३) | with pots of water |
| आश्रमबालवृक्षान् | आश्रम–बालवृक्ष (२.३) | the young trees of the hermitage |
| संवर्धयन्ती | संवर्धयन्ती (सम्+णिच्√वृध्+शतृ+ङीप्, १.१) | while nurturing |
| स्वबलानुरूपैः | स्व–बल–अनुरूप (३.३) | according to your own strength |
| असंशयम् | असंशयम् | without a doubt |
| प्राक्तनया | प्राक्तन (३.१) | due to the previous |
| उपपत्तेः | उपपत्ति (५.१) | reason/experience |
| स्तनंधयप्रीतिम् | स्तनंधय–प्रीति (२.१) | the affection for a suckling infant |
| अवाप्स्यसि | अवाप्स्यसि (अव√आप् कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will obtain |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | यो | घ | टै | रा | श्र | म | बा | ल | वृ | क्षा |
| न्सं | व | र्ध | य | न्ती | स्व | ब | ला | नु | रू | पैः |
| अ | सं | श | यं | प्रा | क्त | न | यो | प | प | त्तेः |
| स्त | नं | ध | य | प्री | ति | म | वा | प्स्य | सि | त्वम् |
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