अथाभिषेकं रघुवंशकेतोः
प्रारब्धमानन्दजलैर्जनन्योः ।
निर्वर्तयामासुरमात्यवृद्धा-
स्तीर्थाहृतैः काञ्चनकुम्भतोयैः ॥
अथाभिषेकं रघुवंशकेतोः
प्रारब्धमानन्दजलैर्जनन्योः ।
निर्वर्तयामासुरमात्यवृद्धा-
स्तीर्थाहृतैः काञ्चनकुम्भतोयैः ॥
प्रारब्धमानन्दजलैर्जनन्योः ।
निर्वर्तयामासुरमात्यवृद्धा-
स्तीर्थाहृतैः काञ्चनकुम्भतोयैः ॥
अन्वयः
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अथ जनन्योः आनन्द-जलैः प्रारब्धं रघुवंश-केतोः अभिषेकम्, अमात्य-वृद्धाः तीर्थ-आहृतैः काञ्चन-कुम्भ-तोयैः निर्वर्तयामासुः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथ जनन्योरानन्दजलैरानन्दबाष्पैः प्रारब्धं प्रक्रान्तं रघुवंशकेतो रामस्याभिषेकममात्यवृद्धास्तीर्थेभ्यो गङ्गाप्रमुखेभ्य आहृतैरानीतैः काञ्चनकुम्भतोयैर्निर्वर्तयामासुर्निष्पादयामासुः ॥
Summary
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Then, the coronation of Rama, the banner of the Raghu dynasty, which was begun with the mothers' tears of joy, was formally completed by the old ministers with waters from golden pitchers brought from sacred pilgrimage sites.
सारांश
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रघुवंश के गौरव राम का अभिषेक माताओं के आनंद के आंसुओं से शुरू हुआ, जिसे बाद में वृद्ध मंत्रियों ने स्वर्ण कलशों और तीर्थों के पवित्र जल से पूर्ण किया।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| अभिषेकं | अभिषेक (२.१) | the coronation |
| रघुवंशकेतोः | रघुवंश–केतु (६.१) | of the banner of the Raghu dynasty |
| प्रारब्धं | प्रारब्ध (प्र+आ√रभ्+क्त, २.१) | begun |
| आनन्दजलैः | आनन्द–जल (३.३) | with tears of joy |
| जनन्योः | जननी (६.२) | of the two mothers |
| निर्वर्तयामासुः | निर्वर्तयामासुः (निर्√वृत् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they completed |
| अमात्यवृद्धाः | अमात्य–वृद्ध (१.३) | the old ministers |
| तीर्थाहृतैः | तीर्थ–आहृत (√आहृत+क्त, ३.३) | brought from holy waters |
| काञ्चनकुम्भतोयैः | काञ्चन–कुम्भ–तोय (३.३) | with waters from golden pitchers |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | भि | षे | कं | र | घु | वं | श | के | तोः |
| प्रा | र | ब्ध | मा | न | न्द | ज | लै | र्ज | न | न्योः |
| नि | र्व | र्त | या | मा | सु | र | मा | त्य | वृ | द्धा |
| स्ती | र्था | हृ | तैः | का | ञ्च | न | कु | म्भ | तो | यैः |
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