साहं तपः सूर्यनिविष्टदृषअटिरूर्ध्वं प्रसूतेश्चरितुं यतिष्ये । भूयो यथा मे जजान्तरेऽपि त्वमेव भर्ता न च विप्रयोगः ॥
साहं तपः सूर्यनिविष्टदृषअटिरूर्ध्वं प्रसूतेश्चरितुं यतिष्ये । भूयो यथा मे जजान्तरेऽपि त्वमेव भर्ता न च विप्रयोगः ॥
अन्वयः
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सा अहम् प्रसूतेः ऊर्ध्वम् सूर्यनिविष्टदृष्टिः (सती) तपः चरितुम् यतिष्ये, यथा मे जन्मान्तरे अपि भूयः त्वम् एव भर्ता (स्याः), च विप्रयोगः न (स्यात्)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सेति॥ साऽहं प्रसूतेरूर्घ्वं सूर्यनिविष्टदृष्टिः सती तथाविधं तपश्चरितुं यतिष्ये। यथा भूयस्तेन तपसा मे मम जननान्तरेऽपि त्वमेव भर्ता स्याः, विप्रयोगश्च न स्यात् ॥
Summary
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"I, Sita, will strive to perform austerities after childbirth, with my gaze fixed on the sun, so that in my next life, you alone will be my husband again, and there will be no separation between us."
सारांश
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संतान को जन्म देने के बाद मैं सूर्य की ओर एकटक देख कर ऐसी तपस्या करूँगी कि अगले जन्म में पुनः आप ही मेरे पति हों और हमारा कभी वियोग न हो।
पदच्छेदः
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| सा | तद् (१.१) | that I |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| तपः | तपस् (२.१) | austerity |
| सूर्यनिविष्टदृष्टिः | सूर्य–निविष्ट–दृष्टि (१.१) | with gaze fixed on the sun |
| ऊर्ध्वम् | ऊर्ध्वम् | after |
| प्रसूतेः | प्रसूति (५.१) | childbirth |
| चरितुम् | चरितुम् (√चर्+तुमुन्) | to practice |
| यतिष्ये | यतिष्ये (√यत् कर्तरि लृट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I will strive |
| भूयः | भूयस् | again |
| यथा | यथा | so that |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| जन्मान्तरे | जन्मान्तर (७.१) | in another life |
| अपि | अपि | also |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| एव | एव | alone |
| भर्ता | भर्तृ (१.१) | husband |
| न | न | not |
| च | च | and |
| विप्रयोगः | विप्रयोग (१.१) | separation |
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