अन्वयः
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अथवा कल्याणबुद्धेः तव अयम् कामचारः मयि न शङ्कनीयः। (किन्तु) मम एव जन्मान्तरपातकानाम् अप्रसह्यः विपाकविस्फूर्जथुः (अस्ति)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कल्याणेति॥ अथवा कल्याणबुद्धेः सुधियस्तव कर्तुः मयि विषयेऽयं त्यागो न कामचार इच्छया करणं न शङ्कनीयः। कामचारशङ्कापि न क्रियत इत्यर्थः। किंतु ममैव जन्मान्तरपातकानामप्रसह्यो विपच्यत इति विपाकः फलम्। स एव विस्फूर्जथुरशनिनिर्घोषः।
स्फूर्जथुर्वज्रनिर्घोषः इत्यमरः (अमरकोशः १.३.१२ ) ॥
Summary
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"Or rather," Sita continues, "this willful act of yours, who are of noble intellect, should not be suspected by me. It is only the unbearable, thunderous fruition of my own sins from past lives."
सारांश
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अथवा कल्याणकारी बुद्धि वाले राम अपनी इच्छा से ऐसा नहीं कर सकते। यह निश्चित ही मेरे पिछले जन्मों के किसी भयानक पाप का फल है जो मुझ पर वज्र बनकर गिरा है।
पदच्छेदः
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| कल्याणबुद्धेः | कल्याण–बुद्धि (६.१) | of (you) of noble intellect |
| अथवा | अथवा | or rather |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| न | न | not |
| कामचारः | काम–चार (१.१) | willful act |
| मयि | अस्मद् (७.१) | towards me |
| शङ्कनीयः | शङ्कनीय (√शङ्क्+अनीयर्, १.१) | to be suspected |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| एव | एव | only |
| जन्मान्तरपातकानाम् | जन्मान्तर–पातक (६.३) | of the sins of past lives |
| विपाकविस्फूर्जथुः | विपाक–विस्फूर्जथु (१.१) | the thunderous fruition |
| अप्रसह्यः | अप्रसह्य (१.१) | unbearable |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | ल्या | ण | बु | द्धे | र | थ | वा | त | वा | यं |
| न | का | म | चा | रो | म | यि | श | ङ्क | नी | यः |
| म | मै | व | ज | न्मा | न्त | र | पा | त | का | नां |
| वि | पा | क | वि | स्फू | र्ज | थु | र | प्र | स | ह्यः |
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