सीता तमुत्थाप्य जगाद वाक्यं
प्रीतास्मि ते सौम्य चिराय जीव ।
बिडौजसा विष्णुरिवाग्रजेन
भ्रात्रा यदित्थं परवानसि त्वम् ॥
सीता तमुत्थाप्य जगाद वाक्यं
प्रीतास्मि ते सौम्य चिराय जीव ।
बिडौजसा विष्णुरिवाग्रजेन
भ्रात्रा यदित्थं परवानसि त्वम् ॥
प्रीतास्मि ते सौम्य चिराय जीव ।
बिडौजसा विष्णुरिवाग्रजेन
भ्रात्रा यदित्थं परवानसि त्वम् ॥
अन्वयः
AI
सौम्य! सीता तम् उत्थाप्य वाक्यम् जगाद - 'ते प्रीता अस्मि। चिराय जीव। यत् त्वम् बिडौजसा विष्णुः इव अग्रजेन भ्रात्रा इत्थम् परवान् असि'।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सीतेति॥ सीता तं लक्ष्मणमुत्थाप्य वाक्यं जगाद। किमिति? हे सौम्य साधो! ते प्रीतास्मि। चिराय चिरं जीव। यद्यस्मात्। बिडौजसेन्द्रेण विष्णुरुपेन्द्र इव। अग्रजेन ज्येष्ठेन भ्रात्रा त्वमित्थं परवान् परतन्त्रोऽसि ॥
Summary
AI
Raising him up, Sita spoke, "O gentle one, I am pleased with you. Live long! For you are thus subservient to your elder brother, just as Vishnu is to his elder brother, Indra (in his Vamana incarnation)."
सारांश
AI
सीता ने उन्हें उठाकर कहा— "हे सौम्य! मैं तुमसे प्रसन्न हूँ, तुम दीर्घायु होओ। जैसे विष्णु इंद्र के आज्ञाकारी रहे, वैसे ही तुम अपने ज्येष्ठ भ्राता के अधीन होकर धर्म का पालन कर रहे हो।"
पदच्छेदः
AI
| सीता | सीता (१.१) | Sita |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| उत्थाप्य | उत्थाप्य (उद्√स्था+णिच्+ल्यप्) | having raised him up |
| जगाद | जगाद (√गद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) | words |
| प्रीता | प्रीता (√प्री+क्त, १.१) | pleased |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| ते | युष्मद् (३.१) | with you |
| सौम्य | सौम्य (८.१) | O gentle one! |
| चिराय | चिराय | for a long time |
| जीव | जीव (√जीव् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | live |
| बिडौजसा | बिडौजस् (३.१) | by Indra |
| विष्णुः | विष्णु (१.१) | Vishnu |
| इव | इव | like |
| अग्रजेन | अग्रज (३.१) | by the elder brother |
| भ्रात्रा | भ्रातृ (३.१) | by the brother |
| यत् | यत् | that |
| इत्थं | इत्थम् | thus |
| परवान् | परवत् (१.१) | dependent |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you are |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सी | ता | त | मु | त्था | प्य | ज | गा | द | वा | क्यं |
| प्री | ता | स्मि | ते | सौ | म्य | चि | रा | य | जी | व |
| बि | डौ | ज | सा | वि | ष्णु | रि | वा | ग्र | जे | न |
| भ्रा | त्रा | य | दि | त्थं | प | र | वा | न | सि | त्वम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.