तदेष सर्गः करुणार्द्रचित्तै-
र्न मे भवद्भिः प्रतिषेधनीयः ।
यद्यर्थिता निहृतवाच्यशल्या-
न्प्राणान्मया धारयितुं चिरं वः ॥
तदेष सर्गः करुणार्द्रचित्तै-
र्न मे भवद्भिः प्रतिषेधनीयः ।
यद्यर्थिता निहृतवाच्यशल्या-
न्प्राणान्मया धारयितुं चिरं वः ॥
र्न मे भवद्भिः प्रतिषेधनीयः ।
यद्यर्थिता निहृतवाच्यशल्या-
न्प्राणान्मया धारयितुं चिरं वः ॥
अन्वयः
AI
तत् करुणा-आर्द्र-चित्तैः भवद्भिः मे एषः सर्गः न प्रतिषेधनीयः, यदि वः मया निहृत-वाच्य-शल्यान् प्राणान् चिरम् धारयितुम् अर्थिता अस्ति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तदिति॥ तत्तस्मादेष मे सर्गो निश्चयः।
सर्गः स्वभावनिर्मोक्षनिशअचयाध्यायसृष्टिषु इत्यमरः। करुणार्द्रचित्तैर्भवद्भिर्न प्रतिषेधनीयः। निर्हृतं वाच्यमेव शल्यं येषां तान्प्राणान्मया चिरं धारयितुं धारणं कारयितुं वो युष्माकमर्थिताऽर्थित्वमिच्छा यदि। अस्तीति शेषः ॥
Summary
AI
Rama tells his brothers, "Therefore, this abandonment (of Sita) by me should not be opposed by you, whose hearts are tender with compassion, if you wish for me to sustain my life for long, with the dart of public slander removed."
सारांश
AI
यदि आप चाहते हैं कि मैं लोकापवाद रूपी शल्य से मुक्त होकर दीर्घकाल तक प्राण धारण करूँ, तो दयालु हृदय वाले आप लोगों को मेरे इस निर्णय का विरोध नहीं करना चाहिए।
पदच्छेदः
AI
| तत् | तत् | therefore |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| सर्गः | सर्ग (१.१) | abandonment |
| करुणार्द्रचित्तैः | करुणा–आर्द्र–चित्त (३.३) | by those with minds tender with compassion |
| न | न | not |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| भवद्भिः | भवत् (३.३) | by you (honorable ones) |
| प्रतिषेधनीयः | प्रतिषेधनीय (प्रति√सिध्+अनीयर्, १.१) | to be opposed |
| यदि | यदि | if |
| अर्थिता | अर्थिता (१.१) | there is a desire |
| निहृतवाच्यशल्यान् | निहृत–वाच्य–शल्य (२.३) | from which the dart of slander has been removed |
| प्राणान् | प्राण (२.३) | life-breaths |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| धारयितुं | धारयितुम् (√धृ+णिच्+तुमुन्) | to sustain |
| चिरं | चिरम् | for a long time |
| वः | युष्मद् (६.३) | your |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | दे | ष | स | र्गः | क | रु | णा | र्द्र | चि | त्तै |
| र्न | मे | भ | व | द्भिः | प्र | ति | षे | ध | नी | यः |
| य | द्य | र्थि | ता | नि | हृ | त | वा | च्य | श | ल्या |
| न्प्रा | णा | न्म | या | धा | र | यि | तुं | चि | रं | वः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.