अवैमि चैनामनघेति किंतु
लोकापवादो बलवान्मतो मे ।
छाया हि भूमेः शशिनो मलत्वे-
नारोपिता शुद्धिमतः प्रजाभिः ॥
अवैमि चैनामनघेति किंतु
लोकापवादो बलवान्मतो मे ।
छाया हि भूमेः शशिनो मलत्वे-
नारोपिता शुद्धिमतः प्रजाभिः ॥
लोकापवादो बलवान्मतो मे ।
छाया हि भूमेः शशिनो मलत्वे-
नारोपिता शुद्धिमतः प्रजाभिः ॥
अन्वयः
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च एनाम् अनघा इति अवैमि, किन्तु मे लोक-अपवादः बलवान् मतः। हि शुद्धिमतः शशिनः भूमेः छाया प्रजाभिः मलत्वेन आरोपिता।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अवैमीति॥ एनां सीतामनघा साधअवीति चावैमि। किंतु मे मम लोकापवादो बलवान्मतः। कुतः? हि यस्मात् प्रजाभिर्भूमेश्चाया प्रतिबिम्बं शुद्धिमतो निर्मलस्य शशिनो मलत्वेन कलङ्कत्वेनारोपिता। अतो लोकापवाद एव बलवानित्यर्थः ॥
Summary
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"And I know she is sinless, but public slander is powerful in my opinion. Indeed, the shadow of the earth is attributed as a stain by the people to the pure moon."
सारांश
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राम ने कहा कि मैं सीता को निष्पाप जानता हूँ, किंतु लोकनिंदा अत्यंत प्रबल है; जैसे लोग चंद्रमा की शुद्धता पर पृथ्वी की छाया को कलंक मानकर मढ़ देते हैं।
पदच्छेदः
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| अवैमि | अवैमि (अव√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I know |
| च | च | And |
| एनाम् | एनद् (२.१) | her |
| अनघा | अनघा (१.१) | sinless |
| इति | इति | to be |
| किंतु | किंतु | but |
| लोकापवादः | लोक–अपवाद (१.१) | public slander |
| बलवान् | बलवत् (१.१) | is powerful |
| मतः | मत (√मन्+क्त, १.१) | is considered |
| मे | अस्मद् (३.१) | by me |
| छाया | छाया (१.१) | the shadow |
| हि | हि | Indeed |
| भूमेः | भूमि (६.१) | of the earth |
| शशिनः | शशिन् (६.१) | on the moon |
| मलत्वेन | मलत्व (३.१) | as a stain |
| आरोपिता | आरोपित (आ√रुह्+णिच्+क्त, १.१) | is attributed |
| शुद्धिमतः | शुद्धिमत् (६.१) | (on the one that is) pure |
| प्रजाभिः | प्रजा (३.३) | by the people |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | वै | मि | चै | ना | म | न | घे | ति | किं | तु |
| लो | का | प | वा | दो | ब | ल | वा | न्म | तो | मे |
| छा | या | हि | भू | मेः | श | शि | नो | म | ल | त्वे |
| ना | रो | पि | ता | शु | द्धि | म | तः | प्र | जा | भिः |
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