किमात्मनिर्वादकथामुपेक्षे
जायामदोषामुत संत्यजामि ।
इत्येकपक्षाश्रयविक्लवत्वा-
दासीत्स दोलाचलचित्तवृत्तिः ॥
किमात्मनिर्वादकथामुपेक्षे
जायामदोषामुत संत्यजामि ।
इत्येकपक्षाश्रयविक्लवत्वा-
दासीत्स दोलाचलचित्तवृत्तिः ॥
जायामदोषामुत संत्यजामि ।
इत्येकपक्षाश्रयविक्लवत्वा-
दासीत्स दोलाचलचित्तवृत्तिः ॥
अन्वयः
AI
किम् आत्म-निर्वाद-कथाम् उपेक्षे? उत अदोषां जायाम् संत्यजामि? इति एक-पक्ष-आश्रय-विक्लवत्वात् सः दोला-चल-चित्त-वृत्तिः आसीत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
किमिति॥ आत्मनो निर्वादोऽपवाद एव कथा तां किमुपेक्षे? उत अदोषां साध्वीं जायां संत्यजामि? उभयत्रापि प्रश्ने लट्। इत्येकपक्षाश्रये अन्यतरपक्षपरिग्रहे विक्लवत्वादपरिच्छेत्तृत्वात्स रामो दोलेव चला चित्तवृत्तिर्यस्य स आसीत् ॥
Summary
AI
"Should I ignore this talk of my own scandal? Or should I abandon my faultless wife?" Thus, due to the distress of being unable to choose one side, his state of mind became like a swinging pendulum.
सारांश
AI
राम इस दुविधा में पड़ गए कि वे लोकनिंदा की उपेक्षा करें या अपनी निर्दोष पत्नी का त्याग करें; उनका मन हिंडोले की तरह डोलने लगा।
पदच्छेदः
AI
| किम् | किम् | Should I |
| आत्मनिर्वादकथाम् | आत्मन्–निर्वाद–कथा (२.१) | the talk of my own scandal |
| उपेक्षे | उपेक्षे (उप√ईक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | ignore |
| जायाम् | जाया (२.१) | wife |
| अदोषाम् | अदोषा (२.१) | faultless |
| उत | उत | or |
| संत्यजामि | संत्यजामि (सम्√त्यज् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | abandon |
| इति | इति | thus |
| एकपक्षाश्रयविक्लवत्वात् | एक–पक्ष–आश्रय–विक्लवत्व (५.१) | due to the distress of being unable to choose one side |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| सः | तद् (१.१) | he |
| दोलाचलचित्तवृत्तिः | दोला–चल–चित्त–वृत्ति (१.१) | whose state of mind was like a swinging pendulum |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कि | मा | त्म | नि | र्वा | द | क | था | मु | पे | क्षे |
| जा | या | म | दो | षा | मु | त | सं | त्य | जा | मि |
| इ | त्ये | क | प | क्षा | श्र | य | वि | क्ल | व | त्वा |
| दा | सी | त्स | दो | ला | च | ल | चि | त्त | वृ | त्तिः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.