अन्वयः
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अथ सीता अधिक-स्निग्ध-विलोचनेन शर-पाण्डुरेण अनक्षर-व्यञ्जित-दोहदेन मुखेन परिणेतुः आनन्दयित्री आसीत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथ सीताऽधिकस्निग्धविलोचनेनात्यन्तमसृणलोचनेन शरवत्तृणविशेषवत् पाण्डुरेणात एव` अनक्षरमवाग्व्यापारं यथा भवति तथा व्यञ्जितं दोहदं गर्भो येन तेन मुखेन परिणेतु पत्युरानन्दयित्र्यासीत् ॥
Summary
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Then, Sita began to delight her husband with her face, which was pale as a Sharad reed and whose eyes were exceptionally tender, revealing her pregnancy cravings without the need for words.
सारांश
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स्नेहपूर्ण नेत्रों और पांडु वर्ण के मुख वाली सीता ने बिना शब्दों के, केवल अपने शारीरिक लक्षणों (दोहद) से पति राम को गर्भाधान का संकेत देकर आनंदित किया।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| अधिकस्निग्धविलोचनेन | अधिक–स्निग्ध–विलोचन (३.१) | with eyes that were exceptionally tender |
| मुखेन | मुख (३.१) | with her face |
| सीता | सीता (१.१) | Sita |
| शरपाण्डुरेण | शर–पाण्डुर (३.१) | pale as a Sharad reed |
| आनन्दयित्री | आनन्दयितृ (१.१) | delighting |
| परिणेतुः | परिणेतृ (६.१) | her husband |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| अनक्षरव्यञ्जितदोहदेन | अनक्षर–व्यञ्जित–दोहद (३.१) | by which pregnancy cravings were revealed without words |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | धि | क | स्नि | ग्ध | वि | लो | च | ने | न |
| मु | खे | न | सी | ता | श | र | पा | ण्डु | रे | ण |
| आ | न | न्द | यि | त्री | प | रि | णे | तु | रा | सी |
| द | न | क्ष | र | व्य | ञ्जि | त | दो | ह | दे | न |
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