स पौरकार्याणि समीक्ष्य काले
रेमे विदेहाधिपतेर्दुहित्रा ।
उपस्थितश्चारु वपुस्तदीयं
कृत्वोपभोगोत्सुकयेव लक्ष्म्या ॥

अन्वयः AI सः काले पौरकार्याणि समीक्ष्य विदेहाधिपतेः दुहित्रा (सह) रेमे। तदीयम् चारु वपुः च कृत्स्न-उपभोग-उत्सुकया इव लक्ष्म्या उपस्थितम् (आसीत्)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) स इति॥ स रामः कालेऽवसरे पौराणां कार्याणि प्रयोजनानि समीक्ष्य विदेहाधिपतेर्दुहित्रा सीतया। उपभोगोत्सुकया, अत एव तदीयं सीतासंबन्धि चारु वपुः कृत्वा स्थितया लक्ष्म्येव। उपस्थितः संगतः सन्। रेमे। उपस्थानं तु संगतिः इति यादवः ॥
Summary AI After attending to the citizens' affairs at the proper time, he (Rama) enjoyed himself with Sita. And his handsome body was attended by royal splendor (Lakshmi), who seemed eager for complete enjoyment.
सारांश AI राजकार्य संपन्न कर राम ने सीता के साथ समय बिताया, जो साक्षात् लक्ष्मी के समान अपने सुंदर रूप से उन्हें आनंदित कर रही थीं।
पदच्छेदः AI
सःतद् (१.१) He
पौरकार्याणिपौरकार्य (२.३) the duties towards the citizens
समीक्ष्यसमीक्ष्य (सम्√ईक्ष्+ल्यप्) having attended to
कालेकाल (७.१) at the proper time
रेमेरेमे (√रम् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) enjoyed
विदेहाधिपतेःविदेहअधिपति (६.१) of the king of Videha
दुहित्रादुहितृ (३.१) with the daughter
उपस्थितम्उपस्थित (उप√स्था+क्त, १.१) was attended
and
चारुचारु (१.१) beautiful
वपुःवपुस् (१.१) body
तदीयम्तदीय (१.१) his
कृत्स्नोपभोगोत्सुकयाकृत्स्नउपभोग–उत्सुका (३.१) by her who was eager for complete enjoyment
इवइव as if
लक्ष्म्यालक्ष्मी (३.१) by Lakshmi (royal splendor)
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
पौ का र्या णि मी क्ष्य का ले
रे मे वि दे हा धि ते र्दु हि त्रा
स्थि श्चा रु पु स्त दी यं
कृ त्वो भो गो त्सु ये क्ष्म्या
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