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पितुर्नियोगाद्वनवासमेवं
निस्तीर्य रामः प्रतिपन्नराज्यः ।
धर्मार्थकामषु समां प्रपेदे
यथा तथैवावरजेषु वृत्तिम् ॥

अन्वयः AI पितुः नियोगात् एवम् वनवासम् निस्तीर्य प्रतिपन्नराज्यः रामः यथा धर्मार्थकामषु तथा एव अवरजेषु (अपि) समाम् वृत्तिम् प्रपेदे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) पितुरिति॥ राम एवं पितुर्नियोगाच्छासनाद्वनवासं निस्तीर्य, अनन्तरं प्रतिपन्नराज्यः प्राप्तराज्यः सन्। धऱ्मार्थकामेषु यथा तथैवावरजेष्वनुजेषु समां वृत्तिं प्रपेदे। अवैषम्येण व्यवहृतवानित्यर्थः ॥
Summary AI Having completed the forest exile as commanded by his father, Rama, who had now regained his kingdom, adopted an equal attitude towards dharma, artha, and kama, and similarly towards his younger brothers.
सारांश AI पिता की आज्ञा से वनवास पूरा कर राज्य प्राप्त करने वाले राम ने धर्म, अर्थ और काम के प्रति तथा अपने छोटे भाइयों के प्रति समान रूप से संतुलित व्यवहार किया।
पदच्छेदः AI
पितुःपितृ (६.१) of his father
नियोगात्नियोग (५.१) from the command
वनवासम्वनवास (२.१) the forest-exile
एवम्एवम् thus
निस्तीर्यनिस्तीर्य (निस्√तृ+ल्यप्) having completed
रामःराम (१.१) Rama
प्रतिपन्नराज्यःप्रतिपन्न (प्रति√पद्+क्त)राज्य (१.१) he who had regained his kingdom
धर्मार्थकामषुधर्मअर्थकाम (७.३) in dharma, artha, and kama
समाम्समा (२.१) an equal
प्रपेदेप्रपेदे (प्र√पद् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) attained
यथायथा as
तथातथा so
एवएव also
अवरजेषुअवरज (७.३) towards his younger brothers
वृत्तिम्वृत्ति (२.१) attitude
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
पि तु र्नि यो गा द्व वा मे वं
नि स्ती र्य रा मः प्र ति न्न रा ज्यः
र्मा र्थ का षु मां प्र पे दे
था थै वा जे षु वृ त्तिम्
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