सभाजनायोपगतान्स दिव्या-
न्मुनीन्पुरस्कृत्य हतस्य शत्रोः ।
शुश्राव तेभ्यः प्रभवादि वृत्तं
स्वविक्रमे गौरवमादधानम् ॥
सभाजनायोपगतान्स दिव्या-
न्मुनीन्पुरस्कृत्य हतस्य शत्रोः ।
शुश्राव तेभ्यः प्रभवादि वृत्तं
स्वविक्रमे गौरवमादधानम् ॥
न्मुनीन्पुरस्कृत्य हतस्य शत्रोः ।
शुश्राव तेभ्यः प्रभवादि वृत्तं
स्वविक्रमे गौरवमादधानम् ॥
अन्वयः
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सः (रामः) सभाजनाय उपगतान् दिव्यान् मुनीन् पुरस्कृत्य, तेभ्यः हतस्य शत्रोः स्व-विक्रमे गौरवम् आदधानं प्रभव-आदि वृत्तं शुश्राव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सभाजनायेति॥ स रामः सभाजनायाभिवन्दनायोपगतान्। दिविभवान्मुनीनगस्त्यादीन्पुरस्कृत्य हतस्य शत्रो रावणस्य प्रभवादि जन्मादिकं स्वविक्रमे गौरवमुत्कर्षमादधानं वृत्तं तेभ्यो मुनिभ्यः शुश्राव श्रुतवान्। विजितोत्कर्षाज्जेतुरुत्कर्ष इत्यर्थः ॥
Summary
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Honoring the divine sages who had come to congratulate him, Rama listened as they recounted the history of his slain enemy, Ravana, from his origin onwards—a tale that instilled even greater pride in his own valor.
सारांश
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स्वागत के लिए आए दिव्य मुनियों का सम्मान कर राम ने उनके मुख से शत्रु रावण के जन्म आदि का वृत्तांत सुना, जिससे उनके स्वयं के पराक्रम का गौरव और बढ़ गया।
पदच्छेदः
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| सभाजनाय | सभाजन (४.१) | for honoring |
| उपगतान् | उपगत (उप√गम्+क्त, २.३) | who had come |
| सः | तद् (१.१) | He (Rama) |
| दिव्यान् | दिव्य (२.३) | divine |
| मुनीन् | मुनि (२.३) | sages |
| पुरस्कृत्य | पुरस्कृत्य (पुरस्√कृ+ल्यप्) | having honored |
| हतस्य | हत (√हन्+क्त, ६.१) | of the slain |
| शत्रोः | शत्रु (६.१) | of the enemy |
| शुश्राव | शुश्राव (√श्रु कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he heard |
| तेभ्यः | तद् (५.३) | from them |
| प्रभवादि | प्रभव–आदि (२.१) | origin and so on |
| वृत्तं | वृत्त (२.१) | the history |
| स्वविक्रमे | स्व–विक्रम (७.१) | in his own valor |
| गौरवम् | गौरव (२.१) | pride |
| आदधानम् | आदधान (आ√धा+शानच्, २.१) | placing |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | भा | ज | ना | यो | प | ग | ता | न्स | दि | व्या |
| न्मु | नी | न्पु | र | स्कृ | त्य | ह | त | स्य | श | त्रोः |
| शु | श्रा | व | ते | भ्यः | प्र | भ | वा | दि | वृ | त्तं |
| स्व | वि | क्र | मे | गौ | र | व | मा | द | धा | नम् |
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