तथैव सुग्रीवबिभीषणादी-
नुपाचरत्कृत्रिमसंविधाभिः ।
संकल्पमात्रोदितसिद्धयस्ते
क्रान्ता यथा चेतसि विस्मयेन ॥
तथैव सुग्रीवबिभीषणादी-
नुपाचरत्कृत्रिमसंविधाभिः ।
संकल्पमात्रोदितसिद्धयस्ते
क्रान्ता यथा चेतसि विस्मयेन ॥
नुपाचरत्कृत्रिमसंविधाभिः ।
संकल्पमात्रोदितसिद्धयस्ते
क्रान्ता यथा चेतसि विस्मयेन ॥
अन्वयः
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(रामः) तथा एव सुग्रीव-बिभीषण-आदीन् कृत्रिम-संविधाभिः उपाचरत्, यथा सङ्कल्प-मात्र-उदित-सिद्धयः ते चेतसि विस्मयेन क्रान्ताः (अभवन्)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तथेति॥ सुग्रीवबिभीषणादीन्। संविधीयन्त इति संविधा भोग्यवस्तूनि। कृत्रिमसंविधाभिस्तथा तेन प्रकारेणैवोपाचरत्। यथा संकल्पमात्रेणेच्छामात्रेणोदितसिद्धयस्ते सुग्रीवादयश्चेतसि विस्मयेन क्रान्ता व्याप्ताः ॥
Summary
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Rama honored Sugriva, Vibhishana, and his other allies with such magnificent man-made arrangements that even they, whose accomplishments arose merely from their will, were filled with wonder in their hearts.
सारांश
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राम ने सुग्रीव और विभीषण आदि का ऐसा सत्कार किया कि संकल्प मात्र से सिद्धियां प्राप्त करने वाले वे अतिथि भी राम के प्रेमपूर्ण व्यवहार से विस्मित रह गए।
पदच्छेदः
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| तथा | तथा | In that way |
| एव | एव | also |
| सुग्रीवबिभीषणादीन् | सुग्रीव–बिभीषण–आदि (२.३) | Sugriva, Vibhishana and others |
| उपाचरत् | उपाचरत् (उप+आ√चर् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he honored |
| कृत्रिमसंविधाभिः | कृत्रिम–संविधा (३.३) | with man-made arrangements |
| संकल्पमात्रोदितसिद्धयः | सङ्कल्प–मात्र–उदित–सिद्धि (१.३) | those whose accomplishments arise from mere will |
| ते | तद् (१.३) | they |
| क्रान्ताः | क्रान्त (√क्रम्+क्त, १.३) | were overcome |
| यथा | यथा | so that |
| चेतसि | चेतस् (७.१) | in the mind |
| विस्मयेन | विस्मय (३.१) | with wonder |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | थै | व | सु | ग्री | व | बि | भी | ष | णा | दी |
| नु | पा | च | र | त्कृ | त्रि | म | सं | वि | धा | भिः |
| सं | क | ल्प | मा | त्रो | दि | त | सि | द्ध | य | स्ते |
| क्रा | न्ता | य | था | चे | त | सि | वि | स्म | ये | न |
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