प्रासादकालागुरुधूमराजि-
स्तस्याः पुरो वायुवशेन भिन्ना ।
वनान्निवृत्तेन रघूत्तमेन
मुक्ता स्वयं वेणिरिवाबभासे ॥

अन्वयः AI तस्याः पुरः वायु-वशेन भिन्ना प्रासाद-काल-अगुरु-धूम-राजिः, वनात् निवृत्तेन रघु-उत्तमेन स्वयं मुक्ता वेणिः इव आबभासे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) प्रासादेति॥ वायुवशेन भिन्ना प्रासादे यः कालागुरुधूमस्तस्य राजीरेखा। वनान्निवृत्तेन रघूत्तमेन रामेण स्वयं मुक्ता तस्याः पुरः पुर्या वेणिरिव। आबभासे। पुरोऽपि पतिव्रतासमाधिरुक्तः। न प्रोषिते तु संस्कुर्वान्न वेणीं च प्रमोचयेत् इति हारीतः ॥
Summary AI The line of smoke from the black aloe wood burning in the city's mansions, scattered by the wind, appeared like the city's single braid of hair, now finally unfastened by Rama himself upon his return from the forest.
सारांश AI महलों से निकलते काले अगरु के धुएं की रेखा वायु से छिन्न-भिन्न होकर ऐसी लग रही थी, जैसे वन से लौटे राम ने स्वयं अयोध्या की विरह-वेणी खोल दी हो।
पदच्छेदः AI
प्रासादकालागुरुधूमराजिःप्रासादकालअगुरुधूमराजि (१.१) the line of smoke from black aloe wood
तस्याःतद् (६.१) of that (city)
पुरःपुरस् in front
वायुवशेनवायुवश (३.१) by the force of the wind
भिन्नाभिन्न (√भिद्+क्त, १.१) parted
वनात्वन (५.१) from the forest
निवृत्तेननिवृत्त (नि√वृत्+क्त, ३.१) by the one who has returned
रघूत्तमेनरघुउत्तम (३.१) by the best of Raghus
मुक्तामुक्त (√मुच्+क्त, १.१) unbraided
स्वयम्स्वयम् by himself
वेणिःवेणि (१.१) a single braid of hair
इवइव like
आबभासेआबभासे (आ√भास् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) appeared
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
प्रा सा का ला गु रु धू रा जि
स्त स्याः पु रो वा यु शे भि न्ना
ना न्नि वृ त्ते घू त्त मे
मु क्ता स्व यं वे णि रि वा भा से
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.