सौमित्रिणा सावरजेन मन्द-
माधूतबालव्यजनो रथस्थः ।
धृतातपत्रो भरतेन साक्षा-
दुपायसंघात इव प्रवृद्धः ॥

अन्वयः AI स-अवरजेन सौमित्रिणा मन्दम् आधूत-बालव्यजनः, भरतेन धृत-आतपत्रः, रथ-स्थः (रामः) साक्षात् प्रवृद्धः उपाय-संघातः इव (बभौ)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) सौमित्रिणेति॥ सावरजेन शश्रुघ्नयुक्तेन सौमित्रिणा लक्ष्मणेन मन्दमाधूते बालव्यजने चामरे यस्य स रथस्थो भरतेन धृतातपत्र एवं चतुर्व्यीहो रामः प्रवृद्धः साक्षादुपायानां सामादीनां संघातः समष्टिरिव। विवेशइति पूर्वेण संबन्धः ॥
Summary AI Seated in his chariot, with Lakshmana (accompanied by Shatrughna) gently waving the chowrie fan and Bharata holding the royal umbrella, Rama appeared like the personification of the four political expedients (Sama, Dana, Bheda, Danda) fully augmented and working in concert.
सारांश AI रथ पर सवार राम पर लक्ष्मण और शत्रुघ्न चंवर ढुलका रहे थे और भरत ने छत्र धारण किया था; वे साक्षात् मूर्त रूप में बढ़े हुए चारों 'नीति-उपायों' के समान लग रहे थे।
पदच्छेदः AI
सौमित्रिणासौमित्रि (३.१) by Lakshmana
सावरजेनअवरज (३.१) with his younger brother (Shatrughna)
मन्दम्मन्दम् gently
आधूतबालव्यजनःआधूत (√आधूत+क्त)–बालव्यजन (१.१) he for whom the chowrie was waved
रथस्थःरथस्थ (१.१) stationed in the chariot
धृतातपत्रःधृत (√धृत+क्त)आतपत्र (१.१) he for whom the umbrella was held
भरतेनभरत (३.१) by Bharata
साक्षात्साक्षात् visibly
उपायसंघातःउपायसंघात (१.१) the collection of political expedients
इवइव like
प्रवृद्धःप्रवृद्ध (प्र√वृध्+क्त, १.१) fully developed
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
सौ मि त्रि णा सा जे न्द
मा धू बा व्य नो स्थः
धृ ता त्रो ते सा क्षा
दु पा सं घा प्र वृ द्धः
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