यां सैकतोत्सङ्गसुखोचितानां
प्राज्यैः पयोभिः परिवर्धितानाम् ।
सामान्यधात्रीमिव मानसं मे
संभावयत्युत्तरकोसलानाम् ॥
यां सैकतोत्सङ्गसुखोचितानां
प्राज्यैः पयोभिः परिवर्धितानाम् ।
सामान्यधात्रीमिव मानसं मे
संभावयत्युत्तरकोसलानाम् ॥
प्राज्यैः पयोभिः परिवर्धितानाम् ।
सामान्यधात्रीमिव मानसं मे
संभावयत्युत्तरकोसलानाम् ॥
अन्वयः
AI
मे मानसम् याम् सैकत-उत्सङ्ग-सुख-उचितानाम् प्राज्यैः पयोभिः परिवर्धितानाम् उत्तरकोसलानाम् सामान्यधात्रीम् इव संभावयति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
यामिति॥ यां सरयूं मे मानसं कर्तृ सैकतं पुलिनं तदेवोत्सङ्गः तत्र यत्सुखँ तत्रोचितानां प्राज्यैः प्रभूतैः पयोभिरम्बुभिः क्षीरैश्च।
पयः क्षीरं पयोऽम्बु च इत्यमरः। परिवर्धितानां पुषअटानामुत्तरकोसलानामुत्तरकोसलेश्वराणां सामान्यधात्रीं साधारणमातरमिव संभावयति। धात्री जनन्यामलकीवसुमत्युपमातृषुइति विश्वः ॥
Summary
AI
My mind regards this Sarayu river as the common foster-mother of the people of North Kosala, who are accustomed to the comfort of her sandy banks and are nourished by her abundant waters.
सारांश
AI
उत्तर कोसल के निवासियों को अपने जल से पालने वाली यह सरयू नदी उनके लिए एक धात्री (माता) के समान है, जिसके रेतीले तटों पर वे सुखपूर्वक विहार करते हैं।
पदच्छेदः
AI
| याम् | यद् (२.१) | whom |
| सैकतोत्सङ्गसुखोचितानाम् | सैकत–उत्सङ्ग–सुख–उचित (६.३) | of those accustomed to the pleasure of the lap of her sandbanks |
| प्राज्यैः | प्राज्य (३.३) | with abundant |
| पयोभिः | पयस् (३.३) | with waters |
| परिवर्धितानाम् | परिवर्धित (परि√वृध्+क्त, ६.३) | of those who have been nourished |
| सामान्यधात्रीम् | सामान्य–धात्री (२.१) | a common wet-nurse |
| इव | इव | like |
| मानसम् | मानस (१.१) | mind |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| संभावयति | संभावयति (सम्√भू +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | considers |
| उत्तरकोसलानाम् | उत्तर–कोसल (६.३) | of the people of North Kosala |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यां | सै | क | तो | त्स | ङ्ग | सु | खो | चि | ता | नां |
| प्रा | ज्यैः | प | यो | भिः | प | रि | व | र्धि | ता | नाम् |
| सा | मा | न्य | धा | त्री | मि | व | मा | न | सं | मे |
| सं | भा | व | य | त्यु | त्त | र | को | स | ला | नाम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.