दुर्गस्त्रिकूटः परिखा समुद्रो
रक्षांसि योधा धनदाच्च वित्तम् ।
शास्त्रं च यस्योशनसा प्रणीतं
स रावणो दैववशाद्विपन्नः ॥
दुर्गस्त्रिकूटः परिखा समुद्रो
रक्षांसि योधा धनदाच्च वित्तम् ।
शास्त्रं च यस्योशनसा प्रणीतं
स रावणो दैववशाद्विपन्नः ॥
रक्षांसि योधा धनदाच्च वित्तम् ।
शास्त्रं च यस्योशनसा प्रणीतं
स रावणो दैववशाद्विपन्नः ॥
अन्वयः
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यस्य दुर्गः त्रिकूटः परिखा समुद्रः योधाः रक्षांसि धनदात् च वित्तम् उशनसा प्रणीतं शास्त्रं च आसीत् सः रावणः दैव-वशात् विपन्नः ।
Summary
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Even Rāvaṇa, who had the Trikūṭa fortress, the ocean as a moat, demons as warriors, wealth from Kubera, and the science of politics authored by Uśanas, perished due to fate.
सारांश
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त्रिकूट जैसा दुर्ग, समुद्र की खाई, राक्षसों की सेना, अथाह धन और शुक्र-नीति जैसा शास्त्र होने पर भी रावण भाग्य के कारण नष्ट हो गया।
पदच्छेदः
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| दुर्गः | दुर्ग (१.१) | fortress |
| त्रिकूटः | त्रिकूट (१.१) | Trikuta (mountain) |
| परिखा | परिखा (१.१) | moat |
| समुद्रः | समुद्र (१.१) | ocean |
| रक्षांसि | रक्षस् (१.३) | demons |
| योधाः | योध (१.३) | warriors |
| धनदात् | धनद (५.१) | from Kubera (god of wealth) |
| च | च | and |
| वित्तम् | वित्त (१.१) | wealth |
| शास्त्रं | शास्त्र (१.१) | scripture/treatise |
| च | च | and |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| उशनसा | उशनस् (३.१) | by Ushanas (Shukracharya) |
| प्रणीतं | प्रणीत (प्र√नी+क्त, १.१) | composed/propounded |
| स | तद् (१.१) | that |
| रावणः | रावण (१.१) | Ravana |
| दैव-वशात् | दैववश (५.१) | due to fate |
| विपन्नः | विपन्न (वि√पद्+क्त, १.१) | perished |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दु | र्ग | स्त्रि | कू | टः | प | रि | खा | स | मु | द्रो |
| र | क्षां | सि | यो | धा | ध | न | दा | च्च | वि | त्तम् |
| शा | स्त्रं | च | य | स्यो | श | न | सा | प्र | णी | तं |
| स | रा | व | णो | दै | व | व | शा | द्वि | प | न्नः |
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