यस्त्यक्त्वा सापदं मित्रं याति निष्ठुरतां वहन् ।
कृतघ्नस्तेन पापेन नरके यात्यसंशयम् ॥

अन्वयः AI यः सापदं मित्रं त्यक्त्वा निष्ठुरतां वहन् याति सः कृतघ्नः तेन पापेन असंशयम् नरके याति ।
Summary AI He who abandons a friend in distress and behaves with cruelty is ungrateful; because of that sin, he undoubtedly goes to hell.
सारांश AI जो व्यक्ति विपत्ति में पड़े मित्र को छोड़कर निष्ठुरता दिखाता है, वह कृतघ्न अपने उस पाप के कारण निश्चित रूप से नरक में जाता है।
पदच्छेदः AI
यःयद् (१.१) who
त्यक्त्वात्यज् (+क्त्वा) having abandoned
सापदंसापद (२.१) in distress/misfortune
मित्रंमित्र (२.१) friend
यातियाति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) goes
निष्ठुरतांनिष्ठुरता (२.१) cruelty
वहन्वहत् (√वह्+शतृ, १.१) bearing/carrying
कृतघ्नःकृतघ्न (१.१) ungrateful
तेनतद् (३.१) by that
पापेनपाप (३.१) sinful person
नरकेनरक (७.१) to hell
यातियाति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) goes
असंशयम्असंशय without doubt
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
स्त्य क्त्वा सा दं मि त्रं
या ति नि ष्ठु तां हन्
कृ घ्न स्ते पा पे
के या त्य सं यम्
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