अन्वयः
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वह्नि-दाह-समुद्भवा अश्वानां दोषः कपीनां मेदसा नाशम् अभ्येति, यथा सूर्य-उदये तमः (नाशम् अभ्येति) ।
Summary
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The affliction of horses caused by burns is cured by the fat of monkeys, just as darkness vanishes at sunrise.
सारांश
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जिस प्रकार सूर्योदय से अंधकार मिट जाता है, उसी प्रकार बंदरों की चर्बी के प्रयोग से आग से जले हुए घोड़ों के घाव ठीक हो जाते हैं।
पदच्छेदः
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| कपीनाम् | कपि (६.३) | of monkeys |
| मेदसा | मेदस् (३.१) | by fat |
| दोषः | दोष (१.१) | fault/blemish |
| वह्नि-दाह-समुद्भवा | वह्नि–दाह–समुद्भव (१.१) | arising from fire-burning |
| अश्वानाम् | अश्व (६.३) | of horses |
| नाशम् | नाश (२.१) | destruction |
| अभ्येति | अभ्येति (अभि√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | approaches/attains |
| तमः | तमस् (१.१) | darkness |
| सूर्योदये | सूर्य–उदय (७.१) | at sunrise |
| यथा | यथा | as |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | पी | नां | मे | द | सा | दो | षो |
| व | ह्नि | दा | ह | स | मु | द्भ | वा |
| अ | श्वा | नां | ना | श | म | भ्ये | ति |
| त | मः | सू | र्यो | द | ये | य | था |
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