अन्वयः
AI
तस्मात् यत्र गृहे नित्यम् अकारणः कलहः स्यात्, जीवितं वाञ्छन् तत्-गृहं दूरतः परिवर्जयेत् ।
Summary
AI
Therefore, one who desires to live should keep far away from a house where there is constant, causeless quarreling.
सारांश
AI
जिस घर में बिना किसी कारण के निरंतर कलह होती रहती है, अपने प्राणों की रक्षा चाहने वाले को ऐसे स्थान का तुरंत त्याग कर देना चाहिए।
पदच्छेदः
AI
| तस्मात् | तस्मात् | therefore |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should be |
| कलहः | कलह (१.१) | quarrel |
| यत्र | यत्र | where |
| गृहे | गृह (७.१) | in a house |
| नित्यम् | नित्यम् | always |
| अकारणः | अ–कारण (१.१) | without reason |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| गृहम् | गृह (२.१) | house |
| जीवितम् | जीवित (२.१) | life |
| वाञ्छन् | वाञ्छन् (√वाञ्छ्+शतृ, १.१) | desiring |
| दूरतः | दूरतः | from afar |
| परिवर्जयेत् | परिवर्जयेत् (परि√वृज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should avoid |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मा | त्स्या | त्क | ल | हो | य | त्र |
| गृ | हे | नि | त्य | म | का | र | णः |
| त | द्गृ | हं | जी | वि | तं | वा | ञ्छ |
| न्दू | र | तः | प | रि | व | र्ज | येत् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.