अन्वयः
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यः अनागतवतीम् असम्भाव्यां चिन्तां करोति, सः सोम-शर्म-पिता यथा पाण्डुरः एव शेते ।
Summary
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He who worries about impossible things that have not yet occurred ends up lying white with ruin, just like Soma-śarman's father.
सारांश
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जो व्यक्ति भविष्य की असंभव बातों की व्यर्थ चिंता और कल्पना करता है, वह सोमशर्मा के पिता की तरह केवल सफेद होकर धराशायी होता है।
पदच्छेदः
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| अनागतवतीम् | आगतवत् (अन्√आगतवत्, २.१) | that which has not come |
| चिन्ताम् | चिन्ता (२.१) | worry |
| असम्भाव्याम् | सम्भाव्य (अन्√सम्भाव्य, २.१) | impossible |
| करोति | करोति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | does |
| यः | यद् (१.१) | who |
| सः | तद् (१.१) | he |
| एव | एव | indeed |
| पाण्डुरः | पाण्डुर (१.१) | pale |
| शेते | शेते (√शी कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | lies down |
| सोमशर्मपिता | सोमशर्मन्–पितृ (१.१) | the father of Somasharma |
| यथा | यथा | just as |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ना | ग | त | व | तीं | चि | न्ता |
| म | स | म्भा | व्यां | क | रो | ति | यः |
| स | ए | व | पा | ण्डु | रः | शे | ते |
| सो | म | श | र्म | पि | ता | य | था |
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