तावत्स्यात्सुप्रसन्नास्यस्तावद्गुरुजने रतः ।
पुरुषो योषितां यावन्न शृणोति वचो रहः ॥

अन्वयः AI पुरुषः यावत् रहः योषितां वचः न शृणोति, तावत् सुप्रसन्न-आस्यः तावत् गुरु-जने रतः स्यात् ।
Summary AI A man remains cheerful and devoted to his elders only as long as he does not listen to the private advice of women.
सारांश AI पुरुष तभी तक प्रसन्नचित्त और गुरुजनों की सेवा में लीन रहता है, जब तक वह एकांत में स्त्रियों की बातों को नहीं सुनता।
पदच्छेदः AI
तावत्तावत् so long
स्यात्स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) may be
सुप्रसन्नास्यःसुप्रसन्नआस्य (१.१) having a very cheerful face
तावत्तावत् so long
गुरुजनेगुरुजन (७.१) in elders
रतःरत (१.१) devoted
पुरुषःपुरुष (१.१) man
योषिताम्योषित् (६.३) of women
यावत्यावत् as long as
not
शृणोतिशृणोति (√श्रु कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) hears
वचःवचस् (२.१) word
रहःरहस् in private
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
ता त्स्या त्सु प्र न्ना स्य
स्ता द्गु रु ने तः
पु रु षो यो षि तां या
न्न शृ णो ति चो हः
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